Falgun amavasya 2026 : कल है फाल्गुन अमावस्या , जानें स्नान-दान का मुहूर्त और महत्व

Falgun amavasya 2026 :फाल्गुन अमावस्या हिंदू पंचांग की महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है. यह दिन पितरों को समर्पित होता है. इस अवसर पर लोग तर्पण, स्नान और दान करते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा करने पर पितरों की कृपा और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है.

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फाल्गुन अमावस्या 2026 फाल्गुन अमावस्या 2026

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:42 PM IST

Falgun AmaVasya 2026:  हिंदू धर्म में हर अमावस्या का अपना महत्व होता है, लेकिन फाल्गुन महीने की अमावस्या को खास तौर पर बहुत शुभ माना जाता है. यह दिन पितरों को याद करने और उनके लिए तर्पण व दान करने का होता है. माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है.  मान्यता यह भी है कि अमावस्या पर स्नान और दान करने से उसका फल कई गुना ज्यादा मिलता है. साथ ही फाल्गुन अमावस्या के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन, सुख और बरकत बनी रहती है. 

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फाल्गुन अमावस्या 2026 की तिथि और समय

वैदिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन अमावस्या 16 फरवरी 2026, सोमवार को प्रातः 5 बजकर 34 मिनट से आरंभ हुई,  यह  17 फरवरी 2026, मंगलवार को सुबह 5 बजकर 30 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि को मानते हुए व्रत, स्नान और दान 17 फरवरी 2026 को किया जाएगा. 

शुभ मुहूर्त

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह लगभग 5:00 बजे से 5:55 बजे तक रहेगा. स्नान और दान का श्रेष्ठ समय सूर्योदय से सूर्यास्त तक माना गया है.  अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:10 बजे से 12:55 बजे तक रहेगा, जो विशेष रूप से पूजा-पाठ के लिए शुभ है. 

धार्मिक मान्यता

धार्मिक विश्वास है कि अमावस्या के दिन पितर सूर्यास्त तक अपने परिवार के आसपास रहते हैं. इस दिन विधि-विधान से किया गया तर्पण पितृ दोष से मुक्ति दिलाने में सहायक माना जाता है. प्रसन्न पितर परिवार को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. साथ ही इस तिथि पर देवी लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. 

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पूजा विधि

फाल्गुन अमावस्या के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए.  यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी, तालाब या सरोवर में स्नान करें, अन्यथा घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाया जा सकता है.  स्नान के बाद घर के मंदिर में दीपक जलाएं, सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें और पितरों का तर्पण करें. श्रद्धानुसार व्रत रखें . जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान दें.  इस दिन भगवान विष्णु का ध्यान और पूजन करना भी शुभ फलदायी माना गया है.

पूजा सामग्री

पूजा में चंदन, अक्षत, तिल, पुष्प, दीपक, गंगाजल और पितरों के नाम से दान की वस्तुएं शामिल की जाती हैं. श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाने वाली मानी जाती है. 

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