Chandra Grahan 2026: आसमान में जल्द ही एक बेहद खास खगोलीय नजारा देखने को मिलेगा. 27 और 28 अगस्त की रात लगने वाला चंद्र ग्रहण इस बार लोगों के लिए और भी खास होगा, क्योंकि इस दौरान चांद लाल रंग में दिखाई देगा. इसी वजह से इसे ब्लड मून कहा जाता है. यह खगोलीय घटना कई घंटों तक चलेगी और दुनिया के अलग-अलग देशों में दिखाई देगी. भारत में भी इसका असर आंशिक रूप से देखा जा सकता है.
क्यों लाल दिखता है चांद?
पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है. ऐसे में सूर्य की सीधी रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती. पृथ्वी के वातावरण से गुजरने वाली लाल रंग की किरणें चंद्रमा तक पहुंचती हैं, जिसकी वजह से चांद लाल, नारंगी या तांबे जैसा दिखाई देता है. इसी अनोखे नजारे को ब्लड मून कहा जाता है.
कितनी देर तक रहेगा ग्रहण?
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह चंद्र ग्रहण करीब 5 घंटे तक असर में रहेगा. ग्रहण के कई चरण होंगे, जिनमें उपच्छाया, आंशिक और पूर्ण चंद्र ग्रहण शामिल हैं. पूर्ण ग्रहण के समय चांद सबसे ज्यादा लाल दिखाई देगा, यही पल सबसे खास माना जाता है. खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह एक शानदार मौका होगा.
भारत में कहां-कहां दिख सकता है ग्रहण?
भारत के कुछ हिस्सों में यह चंद्र ग्रहण साफ दिखाई दे सकता है, जबकि कुछ इलाकों में इसकी दृश्यता कम रहने की संभावना है. मौसम, बादल और स्थानीय समय इसके अनुभव को प्रभावित कर सकते हैं. बड़े शहरों की तुलना में कम रोशनी वाले इलाकों में ब्लड मून ज्यादा साफ दिखाई देता है.
चंद्र ग्रहण कैसे लगता है?
जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है. यह घटना सिर्फ पूर्णिमा की रात को ही संभव होती है. वैज्ञानिकों के अनुसार यह पूरी तरह प्राकृतिक और सामान्य खगोलीय प्रक्रिया है. सूर्य ग्रहण की तरह इसे देखने के लिए किसी खास चश्मे की जरूरत नहीं होती और इसे नंगी आंखों से सुरक्षित देखा जा सकता है.
क्या मोबाइल कैमरे में कैद हो पाएगा ब्लड मून?
आजकल स्मार्टफोन कैमरों की मदद से भी ब्लड मून की तस्वीरें ली जा सकती हैं. अगर कैमरे में नाइट मोड और जूम फीचर अच्छा हो, तो लोग इस खूबसूरत नजारे को आसानी से रिकॉर्ड कर सकते हैं. ट्राइपॉड का इस्तेमाल करने से तस्वीरें और बेहतर आती हैं.
ज्योतिष में क्यों माना जाता है खास?
भारतीय परंपराओं और ज्योतिष में चंद्र ग्रहण को विशेष महत्व दिया जाता है. कई लोग ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप और ध्यान करते हैं. कुछ मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय भोजन करने से बचने और मंदिरों के कपाट बंद रखने की परंपरा भी निभाई जाती है. हालांकि वैज्ञानिक इसे केवल एक प्राकृतिक खगोलीय घटना मानते हैं.
अगला ब्लड मून कब दिखेगा?
खगोल वैज्ञानिकों के मुताबिक ब्लड मून हर साल नहीं दिखाई देता. पूर्ण चंद्र ग्रहण और ब्लड मून का संयोग कुछ खास परिस्थितियों में बनता है. यही वजह है कि दुनियाभर के लोग इस घटना को देखने के लिए उत्साहित रहते हैं.
aajtak.in