Chandrma Gochar: वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक शांति का स्वामी माना गया है. जब यही चंद्रमा अपनी 'नीच' स्थिति यानी वृश्चिक राशि में प्रवेश करते हैं, तो अक्सर जातक के जीवन में उथल-पुथल और निर्णय लेने में भ्रम की स्थिति पैदा होती है. इस बार, 9 मार्च 2026 को सुबह 9:30 बजे चंद्रमा अपनी नीच राशि 'वृश्चिक' में गोचर कर रहे हैं. ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह गोचर मेष, मिथुन और धनु राशि के जातकों के लिए अग्नि परीक्षा जैसा हो सकता है. आइए जानते हैं कि यह खगोलीय बदलाव आपके करियर, धन और रिश्तों को कैसे प्रभावित करेगा.
मेष राशि- आपकी कुंडली के आठवें भाव (अष्टम भाव) में चंद्रमा का गोचर कई अनिश्चितताओं को जन्म दे सकता है. आपके बनते हुए कार्य अचानक रुक सकते हैं. गलत लोगों की संगत आपको न केवल आर्थिक नुकसान दे सकती है, बल्कि आपका कीमती समय भी बर्बाद कर सकती है. इस अवधि में किसी भी प्रकार का नया निवेश न करें. यात्रा के दौरान अपने गहनों और कीमती सामानों का विशेष ध्यान रखें. शिवजी की आराधना करें. प्रतिदिन 'ॐ नमः शिवाय' का 108 बार जाप करें.
मिथुन राशि- कार्यस्थल पर वाणी में रखें संयम- मिथुन राशि के लिए चंद्रमा छठे भाव में संचार करेंगे, जो कि विवादों और गुप्त शत्रुओं का घर माना जाता है. ऑफिस या बिजनेस में सहकर्मियों के साथ तनाव बढ़ने की आशंका है. शत्रु पक्ष सक्रिय हो सकता है.आपकी छवि बिगाड़ने की कोशिश कर सकता है. अपनी बातचीत में विनम्रता बनाए रखें. यदि आप राजनीति या जन-संपर्क के काम में हैं, तो सोच-समझकर बोलें. लेन-देन में कागजी कार्रवाई पूरी रखें. चंद्रमा के बीज मंत्र 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः' का जाप आपके लिए ढाल का काम करेगा.
धनु राशि- धनु राशि के जातकों के लिए चंद्रमा बारहवें भाव यानी व्यय (खर्च) के घर में स्थित होंगे, जो मानसिक अशांति का कारण बन सकता है. आलस्य आप पर हावी रहेगा, जिससे जरूरी काम पेंडिंग हो सकते हैं. आर्थिक नुकसान का योग है. किसी करीबी मित्र से धोखा मिलने की भी प्रबल संभावना है. किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा न करें. फिजूलखर्ची पर नियंत्रण रखें. योग और ध्यान को अपनी दिनचर्या में शामिल करें. सोमवार के दिन शिवलिंग पर ताजे बेलपत्र अर्पित करना आपके लिए अत्यंत लाभकारी होगा.
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