Chaitra Navratri 2026: पंचक-खरमास के बीच आएंगे नवरात्र, घटस्थापना के लिए मिलेगा बस इतना समय

इस साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च सुबह 06:52 बजे से लेकर 20 मार्च सुबह 04:52 बजे तक रहने वाली है. उदिया तिथि के आधार पर घटस्थापना 19 मार्च को ही की जाएगी. इस दिन पंचक और खरमास का साया भी रहेगा.

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19 मार्च को घटस्थापना पर पंचक और खरमास का साया रहने वाला है. (Photo: ITG) 19 मार्च को घटस्थापना पर पंचक और खरमास का साया रहने वाला है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:35 PM IST

Chaitra Navratri 2026: इस साल चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होने जा रहे हैं. पहले दिन घटस्थापना के साथ इस महापर्व का शुभारंभ होगा. और 27 मार्च को महानवमी के साथ नवरात्र समाप्त हो जाएंगे. हालांकि नवरात्र की शुरुआत एक बड़े ही दुर्लभ संयोग में हो रही है. पहले दिन घटस्थापना पर पंचक और खरमास का साया रहने वाला है. खरमास 15 मार्च से 14 अप्रैल तक रहेगा. जबकि पंचक 16 मार्च से 20 मार्च तक रहने वाला है. आइए जानते हैं कि ऐसे में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है.

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चैत्र नवरात्रि 2026 तिथि
नवरात्र में पहले दिन प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना यानी कलश स्थापना होती है. इस साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च सुबह 06:52 बजे से लेकर 20 मार्च सुबह 04:52 बजे तक रहने वाली है. उदिया तिथि के आधार पर घटस्थापना 19 मार्च को ही की जाएगी. इस दिन पंचक और खरमास का साया भी रहेगा.

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्र में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 19 मार्च को सुबह 06:52 बजे से लेकर सुबह 7:43 बजे तक रहने वाला है. इसके बाद अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे के बीच भी घटस्थापना का मौका आपको मिलने वाला है. आप बात करते हैं कि घटस्थापना पर पंचक और खरमास का कितना प्रभाव रहने वाला है.

ज्योतिषविद अरुणेश कुमार शर्मा के अनुसार, खरमास में मांगलिक कार्यों की मनाही होती है. इसलिए आपको शादी-विवाह जैसे मंगल कार्यों से बचना चाहिए. लेकिन इसमें देवी की पूजा, धार्मिक अनुष्ठान या फिर घटस्थापना जैसे शुभ कार्यों को लेकर कोई पाबंदी नहीं है. आप निश्चिंत होकर तय मुहूर्त में घटस्थापना कर सकते हैं. दूसरा, 16 मार्च से लेकर 20 मार्च तक राज पंचक लगेगा. सोमवार से शुरू होने वाले पंचक को राज पंचक कहा जाता है. दूसरे पंचक की तरह यह पंचक अशुभ नहीं माना जाता है. इसलिए इसमें शुभ कार्य या धार्मिक अनुष्ठान करने से कोई दिक्कत नहीं है.

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कैसे करें घटस्थापना?
घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को घटस्थापना के लिए  सबसे उपयुक्त माना गया है. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा सुबह जल्दी उठकर स्नानादि कर लें. फिर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. मिट्टी के बर्तन में मिट्टी डालकर जौ बोएं. इसके बाद एक मिट्टी या तांबे का कलश लें और उसमें जल भरकर सुपारी, सिक्का और अक्षत डाल दें. कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते बांधें और ऊपर से एक नारियल रख दें. इसके बाद इस कलश को देवी की चौकी के पास स्थापित कर दें.

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