Chaitra Navratri 2026: 19 या 20 मार्च, चैत्र नवरात्र कब से शुरू? जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्र शुरू होने वाले हैं. नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के साथ नवदुर्गा पूजा आरंभ होती है. फिर अष्टमी, नवमी तक देवी की निरंतर पूजा-अर्चना होती है. इस दौरान भक्त उपवास रखकर रोज देवी को भोग लगाते हैं.

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इस साल चैत्र नवरात्र पर घटस्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त रहने वाले हैं. (Photo: ITG) इस साल चैत्र नवरात्र पर घटस्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त रहने वाले हैं. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:46 PM IST

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र आने वाले हैं. चैत्र नवरात्र हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होते हैं. पहले दिन घटस्थापना होती है और फिर 9 दिनों तक नवदुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की विधिवत पूजा होती है. इस दौरान लोग उपवास रखते हैं. नौ दिन अलग-अलग तरह के पकवानों का भोग देवी को लगाते हैं. श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ करते हैं. इसमें अष्टमी और महानवमी का दिन सबसे श्रेष्ठ होता है. इस दौरान भक्त कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उन्हें घर आने के लिए आमंत्रित करते हैं और फिर उन्हें भोग-प्रसाद अर्पित करके आशीर्वाद लेते है. आइए जानते हैं कि इस साल चैत्र नवरात्र कब से कब तक रहेंगे.

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चैत्र नवरात्र की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर आरंभ होगी. 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 52 मिनट पर इसकी समाप्ति होगी. ऐसे में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से ही होगा. 27 मार्च को रामनवमी के साथ ही चैत्र नवरात्र का समापन हो जाएगा.

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?
इस साल चैत्र नवरात्र पर घटस्थापना के लिए दो शुभ मुहू्र्त रहने वाले हैं. पहला शुभ मुहूर्त 19 मार्च को सुबह 06:52 बजे से लेकर सुबह 07:43 बजे तक रहेगा. इसके अलावा आप दोपहर को अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना कर सकते हैं. अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से लेकर दोपहर 12:53 बजे तक रहेगा.

पूजन विधि
नवरात्र पहले दिन सुबह स्नानादि के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें. फिर पूजा स्थान पर लाल वस्त्र बिछाकर देवी दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और जल से भरे कलश में सिक्का, सुपारी और अक्षत डालकर उसके मुख पर नारियल रखकर अशोक के पत्ते बांध दें. इसे देवी की चौकी के पास स्थापित करें. फिर बगल में एक अखंड ज्योति प्रज्वलित करें और उसे पूरे नौ दिनों तक निरंतर जलने दें. अगर आप अखंड ज्योति नहीं जला सकते तो प्रतिदिन सुबह पूजा के वक्त दीपक जला लें. पूजा के दौरान ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र का जाप करें. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. अंत में आरती के साथ पूजा का समापन किया जाता है.

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चैत्र नवरात्र का कैलेंडर

कार्यक्रम तारीख
चैत्र नवरात्रि का पहला दिन, कलश स्थापना, मां शैलपुत्री पूजा 19 मार्च, गुरुवार
चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन, मां ब्रह्मचारिणी पूजा 20 मार्च, शुक्रवार
चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा की पूजा 21 मार्च, शनिवार
चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन, मां कूष्मांडा की पूजा 22 मार्च, रविवार
चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन, मां स्कंदमाता की पूजा 23 मार्च, सोमवार
चैत्र नवरात्रि का छठा दिन, मां कात्यायनी की पूजा 24 मार्च, मंगलवार
चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन, मां कालरात्रि पूजा 25 मार्च, बुधवार
चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन, मां महागौरी पूजा, अष्टमी कन्या पूजन 26 मार्च, गुरुवार
चैत्र नवरात्रि का नौवा दिन, मां सिद्धिदात्री पूजा, नवमी कन्या पूजन 27 मार्च, शुक्रवार
चैत्र नवरात्रि व्रत का पारण 28 मार्च, शनिवार

 

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