'स्वाभिमान का शुक्रवार', भोजशाला में 721 साल बाद मां वाग्देवी की महाआरती

सकल हिंदू समाज ने शुक्रवार, 22 मई को भोजशाला स्थित मां वाग्देवी मंदिर में विशेष पूजा और महाआरती का आयोजन करने की घोषणा की है. 721 साल बाद हिंदू समाज विधिवत रूप से अपनी देवी की महाआरती करेगा.

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शुक्रवार को दोपहर 1 बजे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और महाआरती की जाएगी. (Photo: ITG) शुक्रवार को दोपहर 1 बजे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और महाआरती की जाएगी. (Photo: ITG)

छोटू शास्‍त्री

  • धार,
  • 20 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:05 AM IST

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित किए जाने के ऐतिहासिक फैसले के बाद भक्तों में उत्साह है. इसी के साथ श्रद्धालुओं को यहां पूजा-अर्चना का अधिकार भी मिल गया है. अब सकल हिंदू समाज ने शुक्रवार, 22 मई को भोजशाला स्थित मां वाग्देवी मंदिर में विशेष पूजा और महाआरती का आयोजन करने की घोषणा की है. हिंदू समाज को सदियों बाद इस धार्मिक स्थल पर मां वाग्देवी की विधिवत महाआरती का मौका मिला है.

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इस दौरान भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने बताया कि 721 साल बाद हिंदू समाज विधिवत रूप से अपनी देवी की महाआरती करेगा. इसके लिए पूरे शहर में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. उन्होंने बताया कि 22 मई को दोपहर 12 बजे धार के विभिन्न क्षेत्रों से आए हिंदू समाज के लोग धानमंडी में इकट्ठा होंगे. यहां से सभी लोग सामूहिक रूप से भोजशाला स्थित मां सरस्वती मंदिर के लिए रवाना होंगे. इसके बाद दोपहर 1 बजे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और महाआरती की जाएगी.

‘स्वाभिमान का शुक्रवार’
इस बीच महाआरती के आयोजकों का कहना है कि यह धार्मिक अनुष्ठान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हिंदू धर्म के स्वाभिमान से जुड़ा अवसर भी है. उन्होंने कहा कि 721 साल बाद ऐसा शुक्रवार आया है.  शुक्रवार के दिन ही न्यायालय ने हमारे पक्ष में फैसला दिया. अब एक नया शुक्रवार आ रहा है. इस शुभ वेला में सकल हिंदू समाज भोजशाला में पूजा-अर्चना और महाआरती करेगा.

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इस दौरान आयोजकों ने कहा कि पहले हिंदू यहां सिर्फ बसंत पंचमी के दिन ही पूजा कर सकते थे. लेकिन तब बसंत पंचमी पर पूजा करने को लेकर भी बड़ा संघर्ष हुआ. अब न्यायालय ने हमें पूरे 365 दिन पूजा करने का अधिकार दिया है. यह दिन हिंदू समाज के लिए विशेष महत्व रखता है और इसे श्रद्धा व अनुशासन के साथ मनाया जाएगा.

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