Bada Mangal 2026: यहां चिट्ठियों से फरियाद सुनते हैं हनुमान! नीम करोली बाबा से जुड़ी है कहानी

लखनऊ के हनुमान सेतु मंदिर में ज्येष्ठ के बड़े मंगल पर भक्तों की भारी भीड़ जमा होती है. इस मंदिर के निर्माण के पीछे एक बड़ी ही दिलचस्प कहानी है. कहा जाता है कि हनुमान जी के बड़े भक्त नीम करोली बाबा की सलाह के बाद एक इंजीनियर ने इस मंदिर को बनवाया था.

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इस मंदिर में बजरंगबली को जागृत देव मानकर अपनी मनोकामनाएं चिट्ठियों के जरिए उन्हें भेजते हैं. (Photo: ITG) इस मंदिर में बजरंगबली को जागृत देव मानकर अपनी मनोकामनाएं चिट्ठियों के जरिए उन्हें भेजते हैं. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:44 PM IST

Bada Mangal 2026: आज ज्येष्ठ का पहला बड़ा मंगल है. सनातन परंपरा में ज्येष्ठ के बड़े मंगल का विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन देशभर के हनुमान मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ इकट्ठा होती है. राजधानी लखनऊ के श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर का नजारा भी बड़ा अलौकिक रहता है. इसे हनुमान सेतु मंदिर भी कहा जाता है. इस मंदिर के प्रति भक्तों की बड़ी आस्था है. यहां लोग बजरंगबली को जागृत देव मानकर अपनी मनोकामनाएं चिट्ठियों के जरिए उन्हें भेजते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद जरूर पूरी होती है.

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कहते हैं कि हनुमान सेतु मंदिर में बजरंगबली अष्ट सिद्धि के दाता और रुद्रावतार के रूप में विराजमान हैं. यहां हनुमान की सफेद प्रतिमा है. इस प्रतिमा की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की गई है, जिससे यहां बजरंगबली की दिव्य शक्ति सदैव जागृत रहती हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि हनुमान जी के इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं.

इस मंदिर की एक अनोखी परंपरा भी है. भक्त यहां अपनी इच्छाएं कागज पर लिखकर बजरंगबली को अर्पित करते हैं. मान्यता है कि हनुमान जी इन चिट्ठियों के माध्यम से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. हनुमान सेतु मंदिर के निर्माण की एक दिलचस्प कहानी भी है.

हनुमान सेतु मंदिर

कैसे बना था हनुमान सेतु मंदिर?
हनुमान सेतु मंदिर के निर्माण से जुड़ी एक रोचक कथा भी प्रचलित है. कहा जाता है कि वर्ष 1960 में गोमती नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया था कि शहर पर खतरा मंडराने लगा था. तब नदी पर एक पुल बनाने की जरूरत थे. लेकिन पुल बनाने की कोशिशें कई बार असफल रहीं, क्योंकि पुल को साधने वाले खंभे पानी में टिक नहीं पाते थे.

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तब हनुमान जी के भक्त नीम करोली बाबा ने पुल बनाने वाले इंजीनियर को हनुमान जी का मंदिर बनाने की सलाह दी. कहते हैं कि हनुमान मंदिर का निर्माण कराने के बाद ही पुल का निर्माण सफल हुआ. आज हनुमान जी के इसी मंदिर को हनुमान सेतु मंदिर के नाम से जाना जाता है. इस मंदिर में मंगलवार के दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. ज्येष्ठ महीने में पड़ने वाले बड़े मंगल के अवसर पर यहां विशेष आयोजन किए जाते हैं. मंदिर परिसर में पैर रखने तक की जगह नहीं होती है और चारों ओर भक्ति का माहौल छा जाता है.

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