Akshaya Tritiya 2026: 19 या 20 अप्रैल, अक्षय तृतीया कब है? ज्योतिषविद ने पंचांग देखकर बताई सही तारीख

Akshaya Tritiya 2026: श्रीपति त्रिपाठी ने बताया कि पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 45 मिनट से लेकर 20 अप्रैल को 7 बजकर 49 मिनट तक रहेगी. ऐसे यह तिथि दोनों दिनों को स्पर्श करती है. इसी कारण जनमानस में संशय उत्पन्न हो रहा है. शास्त्रों में अक्षय तृतीया के निर्धारण में उदयकालिक तिथि को विशेष महत्व दिया गया है.

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अक्षय तृतीया के दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती है. (Photo: ITG) अक्षय तृतीया के दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:40 PM IST

Akshaya Tritiya 2026: इस साल अक्षय तृतीया की तारीख को लेकर बहुत कंफ्यूजन है. कोई 19 अप्रैल तो कोई 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया बता रहा है. हालांकि अक्षय तृतीया की सही तिथि और शास्त्र सम्मत मुहूर्त जाने-माने ज्योतिषविद डॉ. श्रीपति त्रिपाठी ने बता दिया है. अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से जाना जाता है. सनातन धर्म का एक अत्यंत पवित्र, पुण्यदायी और शुभ पर्व है. इस दिन को अबूझ मुहूर्त माना गया है. यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती है. मसलन विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय, संपत्ति क्रय और मांगलिक कार्य इस दिन बिना पंचांग देखे किए जा सकते हैं.

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अक्षय तृतीया 2026 तिथि
श्रीपति त्रिपाठी ने बताया कि पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 45 मिनट से लेकर 20 अप्रैल को  7 बजकर 49 मिनट तक रहेगी. ऐसे यह तिथि दोनों दिनों को स्पर्श करती है. इसी कारण जनमानस में संशय उत्पन्न हो रहा है. शास्त्रों में अक्षय तृतीया के निर्धारण में उदयकालिक तिथि को विशेष महत्व दिया गया है.

इसका मतलब है कि जिस दिन सूर्योदय के समय संबंधित तिथि विद्यमान होती है. इस हिसाब से 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाई जानी चाहिए. हालांकि 20 अप्रैल को वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि सुबह जल्दी समाप्त हो जाएगा. पूरा दिन मुहूर्त और योग रहित रहेगा. इसलिए 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया माना ज्यादा शास्त्र सम्मत होगा.

अक्षय तृतीया पर दान से मिलेगा अक्षय फल 
शास्त्रों में वर्णित है कि अक्षय तृतीया के दिन किए गए दान, जप, तप और पुण्य कर्मों का फल अक्षय होता है. यानी वह कभी नष्ट नहीं होता है. जीवन में अस्थायी सुख समृद्धि प्रदान करता है. यही कारण है कि इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व बताया गया है. विशेष रूप से जल,अन्न, सत्तू और वस्त्र आदि का दान अत्यंत पुण्यकारी माना गया है. पितरों के निमित्त किए गए कर्म भी इस दिन अक्षय फल प्रदान करते हैं.

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सोना-चांदी खरीदने का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया को युगादि तिथि भी कहा गया है. इसी दिन सतयुग के आरंभ की मान्यता है. साथ ही, यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना के लिए भी अत्यंत शुभ माना गया है. इस दिन श्रद्धा पूर्वक पूजा-अर्चना से जीवन में धन-वैभव और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. अक्षय तृतीया का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि इस दिन संपत्ति और निवेश से जुड़े कार्य करना अत्यंत शुभ माना गया जाता है. सोना-चांदी खरीदना, भूमि या भवन खरीदना, नया व्यवसाय शुरू करना इस दिन विशेष रूप से लाभकारी माने जाते हैं. मान्यता है कि इस दिन किया गया निवेश निरंतर वृद्धि और स्थायित्व प्रदान करता है.

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