सरिस्का में ‘सुल्तान’ की धमाकेदार वापसी, दो साल बाद दिखा चर्चित टाइगर, शावकों संग दिखीं टाइग्रेस

अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में इन दिनों लगातार टाइगर साइटिंग से पर्यटक रोमांचित हैं. दो साल बाद चर्चित टाइगर एसटी-18 सुल्तान दिखाई दिया, जबकि टाइग्रेस एसटी-19 और 2302 अपने शावकों के साथ नजर आईं. लगातार बढ़ रही वन्यजीव गतिविधियों से सरिस्का फिर चर्चा में आ गया है.

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सरिस्का सफारी में टूरिस्टों को मिला डबल सरप्राइज. (Photo: Screengrab) सरिस्का सफारी में टूरिस्टों को मिला डबल सरप्राइज. (Photo: Screengrab)

हिमांशु शर्मा

  • अलवर,
  • 25 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:00 PM IST

अलवर जिले के सरिस्का टाइगर रिजर्व का बफर क्षेत्र इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. जंगल के अलग-अलग ट्रैक पर लगातार टाइग्रेस और उनके शावकों की साइटिंग हो रही है. इससे सरिस्का में एक बार फिर वन्यजीव गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं. सबसे ज्यादा चर्चा करीब दो साल बाद दिखाई दिए चर्चित एसटी-18 टाइगर ‘सुल्तान’ की हो रही है.

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रविवार शाम अलवर शहर के नजदीक अंधेरी ट्रैक पर सफारी के दौरान पर्यटकों को सुल्तान दिखाई दिया. लंबे समय बाद टाइगर को सामने देखकर टूरिस्टों में खासा उत्साह देखने को मिला. वन विभाग और वाइल्डलाइफ प्रेमियों के लिए भी यह साइटिंग राहत और खुशी की खबर मानी जा रही है.

इसके अलावा एसटी-19 टाइग्रेस अपने चार शावकों के साथ नजर आई. वहीं अंधेरी ट्रैक पर टाइग्रेस 2302 और उसके शावकों की साइटिंग भी हुई. लगातार हो रही इन साइटिंग से साफ है कि इन दिनों सरिस्का का बफर क्षेत्र टाइगर मूवमेंट का बड़ा केंद्र बना हुआ है. शहर के नजदीक बाघिन और शावकों की गतिविधियां बढ़ने के बाद सरिस्का प्रशासन ने लोगों के लिए सतर्कता एडवाइजरी भी जारी की है.

एसटी-19 अपने चार शावकों के साथ आई नजर

इन दुर्लभ पलों को प्रख्यात वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर हिमांशु शर्मा ने अपने कैमरे में कैद किया. उन्होंने बताया कि रविवार शाम बारा लिवारी ट्रैक पर सफारी शुरू होते ही पहले पानी के पॉइंट पर एसटी-19 अपने चार शावकों के साथ दिखाई दी. करीब एक घंटे बाद अंधेरी ट्रैक पर टाइग्रेस 2302 और उसके शावकों की उम्मीद थी, लेकिन वहां अचानक एसटी-18 सुल्तान दिखाई दिया, जिसने सभी को चौंका दिया.

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हिमांशु शर्मा ने बताया कि सुल्तान बहुत कम दिखाई देने वाला टाइगर है. वह आमतौर पर पर्यटकों के सामने जल्दी नहीं आता और जब भी सामने आता है तो उसका एग्रेसिव रूप देखने को मिलता है. जिप्सी देखते ही वह अक्सर घने जंगल की ओर चला जाता है. लगभग दो साल बाद उसकी साइटिंग होना वन्यजीव प्रेमियों के लिए बेहद खास माना जा रहा है.

बताया जाता है कि सुल्तान की टेरिटरी काफी बड़ी है. वह अकबरपुर, नारायणपुर और बानसूर तक के इलाकों में मूवमेंट करता है, लेकिन अधिकतर समय घने जंगलों में रहना पसंद करता है. अलवर बफर जोन में एसटी-19 और टाइग्रेस 2302 के शावकों का पिता भी यही सुल्तान है.

तस्वीरों और वीडियो में टाइगर्स का स्वाभाविक मूवमेंट और शावकों की अठखेलियां साफ दिखाई दे रही हैं. जंगल में खेलते और घूमते शावकों के दृश्य पर्यटकों को काफी आकर्षित कर रहे हैं. लगातार हो रही साइटिंग के कारण सरिस्का आने वाले टूरिस्टों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है.

शावकों की हलचल से अलर्ट मोड में प्रशासन

एक ही सफारी में कई टाइगर फैमिली दिखाई देने से सरिस्का का बफर क्षेत्र इन दिनों खास चर्चा में है. वन विभाग भी इन गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि पर्यटकों की सुरक्षा और वन्यजीवों की निगरानी सही तरीके से की जा सके.
 

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