राजस्थान एंटी नार्कोटिक्स टास्क फोर्स ने सोमवार देर रात जोधपुर के लूणावपुर गांव में एक अत्याधुनिक ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया. सुरक्षा बलों ने जवाबी फायरिंग के बाद खंडहरनुमा घर से 90 करोड़ रुपये की एमडी ड्रग्स और पांच प्रशिक्षित तस्करों को गिरफ्तार किया. प्रदेश में इस साल अब तक 634 करोड़ 74 लाख रुपये से ज्यादा का नशा जब्त कर 303 लोगों को जेल भेजा जा चुका है. बाड़मेर, जालौर और जोधपुर के ग्रामीण इलाकों में खेतों और झोपड़ियों के अंदर ये अवैध लैब संचालित की जा रही थीं. पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार के नेतृत्व में टास्क फ़ोर्स ने स्थानीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए बड़ा अभियान छेड़ रखा है. वहीं, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर राज्य में पहली बार 18 विशेष एंटी नार्कोटिक्स पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं.
जोधपुर के लूणावपुर में टास्क फ़ोर्स पर छत से फायरिंग कर तस्करों ने भागने की कोशिश की, लेकिन जवानों ने घेराबंदी कर हापूराम, बुधराम समेत पांच लोगों को धर दबोचा. ये आरोपी एमडी ड्रग्स बनाने में पूरी तरह प्रशिक्षित थे और स्थानीय स्तर पर सप्लाई कर रहे थे. मौके से 167 किलो तैयार एमडी बरामद हुई, जिसकी बाजार में कीमत 90 करोड़ रुपये आंकी गई है.
खेतों और झोपड़ियों में छिपी हाईटेक लैब
नशे का ये काला कारोबार अब जालौर और बाड़मेर के खेतों तक पहुंच गया है. जालौर के अचलाराम देवासी के खेत पर छापा मारकर पुलिस ने भारी मात्रा में एसीटोन और टोल्यूनि जैसे केमिकल जब्त किए. वहीं बाड़मेर के धोरीमन्ना में एक झोपड़ी के अंदर फैक्ट्री चलाई जा रही थी. माफिया पुलिस से बचने के लिए गुजरात पापड़ के पैकेटों में ड्रग्स की पैकिंग कर रहे थे.
4 महीने में 635 करोड़ की जब्ती
राजस्थान में नशे के खिलाफ कार्रवाई के आंकड़े चौंकाने वाले हैं. साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही 634 करोड़ 74 लाख 96 हजार 703 रुपये की ड्रग्स पकड़ी गई है. इस दौरान 190 मुकदमे दर्ज हुए और 303 तस्करों को सलाखों के पीछे पहुंचाया गया. पहले ये कारोबार केवल सीमावर्ती जिलों तक सीमित था, लेकिन अब ये जोधपुर और जालौर जैसे जिलों के गांवों में जड़ें जमा चुका है.
गांवों में बढ़ती लत
वहीं, दौसा और सवाईमाधोपुर जैसे जिलों के सरकारी अस्पतालों में अब रोजाना 5-6 मरीज नशे की लत के कारण पहुंच रहे हैं.
पुलिस जांच में सामने आया है कि ड्रग्स माफिया अब मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों से प्रशिक्षण लेकर ग्रामीण इलाकों में फैक्टरियां स्थापित कर रहे हैं. पहले केमिस्ट गुजरात-महाराष्ट्र से बुलाए जाते थे, लेकिन अब इंटरनेट पर उपलब्ध फॉर्मूले के जरिए स्थानीय लोग भी MD ड्रग्स बनाने लगे हैं.
राजस्थान एंटी नार्कोटिक्स यूनिट के प्रमुख IG विकास कुमार ने कहा, 'समाज में ड्रग्स माफिया की स्वीकार्यता इनकी कमाई की वजह से बढ़ रही है. जेल से छूटते हीं शादी हो जाती है. कई तो सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर बनकर सोशल मीडिया के जरीए अपना व्यापार फैलाते है.'
IG विकास कुमार ने बताया, 'हम स्थानीय स्तर पर संपर्क स्थापित कर इन ड्रग्स माफियाओं तक पहुंच रहे हैं और इन्हें मिटा रहे हैं, लेकिन हमारे लिए बड़ी चुनौती नशे के शिकार लोगों को इससे दूर करना है. जब तक डिमांड रहेगी सप्लाई के लिए माफिया नए नए रास्ते तलाशेंगे.'
शरत कुमार