राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में एक 12 साल की बच्ची और उसकी मां पर तेज़ाब फेंककर उनकी जिंदगी तबाह करने वाले आरोपी को अजमेर के महिला उत्पीड़न कोर्ट ने ऐतिहासिक सजा सुनाई है. न्यायाधीश उत्तमा माथुर ने दोषी मोहम्मद इस्माइल को आजीवन कारावास और दो लाख रुपये के आर्थिक दंड से दंडित किया है.
यह घटना चित्तौड़गढ़ जीआरपी थाने से जुड़ी है. पीड़िता और उसकी 12 साल की मासूम बेटी अजमेर से चित्तौड़गढ़ गई थीं. सुबह जब वे चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक के पास शौचालय के लिए गई थीं, तभी आरोपी मोहम्मद इस्माइल ने बालिका पर तेजाब फेंक दिया. जब मां अपनी बेटी को बचाने आई, तो आरोपी ने उन पर भी एसिड से हमला कर दिया. इस हमले में मासूम बच्ची ने अपनी दोनों आंखों की रोशनी हमेशा के लिए खो दी.
सजा सुनाते समय कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की. अदालत ने कहा कि तेज़ाब का हमला केवल शरीर को ही नहीं जलाता, बल्कि पीड़ित के भविष्य, उसके सपनों और पूरे परिवार की खुशियों को राख कर देता है. यह ऐसा घाव है जिसे पीड़ित को ताउम्र सहना पड़ता है.
विशेष लोक अभियोजक नरेश कुमार ने बताया कि आरोपी मोहम्मद इस्माइल, जो मध्य प्रदेश के इंदौर का रहने वाला है, उसे घटना के अगले ही दिन सीसीटीवी फुटेज और अभय कमांड सेंटर की मदद से गिरफ्तार कर लिया गया था. अभियोजन पक्ष ने इस मामले को साबित करने के लिए 17 गवाहों को पेश किया, 57 दस्तावेजी सबूत न्यायालय के समक्ष रखे. 6 आर्टिकल प्रदर्शित किए.
कोर्ट ने पीड़िता की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अजमेर को अनुशंसा की है कि उन्हें किसी अन्य लाभकारी प्रतिकर योजना के तहत और अधिक सहायता राशि प्रदान की जाए, ताकि उनके इलाज और पुनर्वास में मदद मिल सके.
चंद्रशेखर शर्मा