सवाल सुनते ही चीखने और चिल्लाने लगीं दिनेश और मंगीलाल की पत्नियां, बेटे के लिए खरीदा था NEET का पेपर 

NEET UG-2026 पेपर लीक केस में गिरफ्तार मंगीलाल और दिनेश बिवाल के परिवार के बयान चर्चा में हैं. मीडिया के सवालों पर महिलाएं कभी चिल्लाती रहीं, कभी हाथ जोड़ती रहीं. परिवार के कई बच्चों के MBBS में चयन के बावजूद महिलाओं ने कहा कि उन्हें बच्चों के मेडिकल कॉलेज और शहर तक की जानकारी नहीं है. CBI अब टेलीग्राम चैट, व्हाट्सएप रिकॉर्ड और 150 संदिग्ध छात्रों के नेटवर्क की जांच कर रही है.

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NEET पेपर लीक में गिरफ्तार दिनेश और मंगीलाल की पत्नी ठीक के जवाब नहीं दे रही (Photo: ITG) NEET पेपर लीक में गिरफ्तार दिनेश और मंगीलाल की पत्नी ठीक के जवाब नहीं दे रही (Photo: ITG)

शरत कुमार

  • जयपुर ,
  • 15 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:25 AM IST

NEET UG-2026 पेपर लीक केस में गिरफ्तार आरोपी मंगीलाल और दिनेश बिवाल की पत्नियां किसी सवाल का ठीक से जवाब नहीं दे रहीं. कैमरा देखते ही परिवार की महिलाएं कभी हाथ जोड़ने लगीं, कभी जोर-जोर से चिल्लाने लगीं और कभी खुद को पूरी तरह इस मामले से अनजान बताने लगीं.  MBBS कर रहे अपने ही बच्चों के बारे में पूछे गए सवालों पर उन्होंने कहा कि हमें नहीं मालूम बच्चे कहां पढ़ते हैं. उन्हें शहर का नाम तक नहीं पता.

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आजतक की टीम जब आरोपियों के परिवार तक पहुंची तो बातचीत के दौरान कई विरोधाभासी बातें सामने आईं. दोनों महिलाएं, जो आपस में बहनें हैं, बार-बार यह दावा करती रहीं कि उनका परिवार निर्दोष है और उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है. कभी वे कहतीं कि हमारे बच्चे मेहनत करके पढ़े हैं, तो अगले ही पल यह भी कह देतीं कि हमें नहीं पता वे किस मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे हैं. सवाल जैसे-जैसे गहरे होते गए, आवाजें भी ऊंची होती गईं. महिलाएं बार-बार मीडिया से कहती रहीं परेशान मत करो. हमारे आदमी को ले गए. अब क्या बोलें?  

पहले भी पेपर लीक होता रहा था 

पूछने पर कि आखिर परिवार के इतने बच्चे MBBS में कैसे पहुंचे, जवाब मिला कि बकरी बेचकर पढ़ाया. जमीन बेचकर पढ़ाया. लेकिन जब गुंजन, विकास, प्रगति और सोनिया के कॉलेज या शहर का नाम पूछा गया तो वे कोई साफ जवाब नहीं दे सकीं. बातचीत के दौरान दोनों महिलाएं बार-बार यह भी दोहराती रहीं कि पेपर लीक तो हर साल होता है. उनका कहना था कि 2021 में भी हुआ 2024 में भी हुआ. तब कोई नहीं आया. इस बार हमारे परिवार को दुश्मन बना दिया.

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हमारे घर वालों को निशाना बनाया जा रहा 

उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े लोगों को बचाने के लिए उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है. हालांकि इन आरोपों पर CBI की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. इसी बीच जांच एजेंसियों के हाथ लगे दस्तावेजों और सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है. जमवारामगढ़ की 6 नवंबर 2025 की एक पोस्ट अब जांच एजेंसियों के रडार पर है. इस पोस्ट में आरोपी दिनेश बिवाल अपने परिवार के पांच बच्चों के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS चयन पर बधाई देता दिखाई दे रहा है. यही पोस्ट अब उन दावों से टकरा रही है, जिनमें परिवार की महिलाएं कह रही हैं कि उन्हें यह तक नहीं पता कि उनके बच्चे कहां पढ़ाई कर रहे हैं. CBI अब तक मंगीलाल, दिनेश और MBBS छात्र विकास बिवाल को गिरफ्तार कर चुकी है. तीनों को पूछताछ के लिए दिल्ली ले जाया गया है. विकास बिवाल का नाम इसलिए चर्चा में है क्योंकि वह NEET 2025 में चयनित होकर सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज में MBBS कर रहा था.

बेटा फिलहाल फरार

जांच एजेंसियों के मुताबिक दिनेश बिवाल का नाबालिग बेटा फिलहाल फरार है. आरोप है कि उसी के लिए कथित तौर पर पेपर खरीदा गया था. सूत्रों का दावा है कि सीकर में रह रहे इस नाबालिग ने कई छात्रों तक कथित प्रश्नपत्र पहुंचाए और कुछ मामलों में लाखों रुपये की डील भी हुई. राजस्थान SOG ने ऐसे करीब 150 छात्रों की सूची CBI को सौंपी है, जिनके नाम इस नेटवर्क में सामने आए हैं. हालांकि अभी तक सभी की भूमिका स्पष्ट नहीं हुई है और जांच जारी है. इस केस में देहरादून से पकड़े गए सीकर के काउंसिलर राकेश कुमार मंडवारिया का नाम भी सामने आया है. जांच में पता चला कि उसके Telegram ग्रुप से करीब 700 छात्र जुड़े थे. वह इसे गेस पेपर बताता रहा, लेकिन CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि छात्रों तक असली प्रश्नपत्र पहुंचा था या नहीं.

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बनारस में लिया था दाखिला 

गिरफ्तार दिनेश बिवाल की बेटी गुंजन बिवाल भी पिछले साल MBBS में चयनित हुई थी और उसे बनारस मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला था. परिवार के अन्य बच्चों के मेडिकल कॉलेजों में चयन की जानकारी भी जांच एजेंसियों के पास मौजूद है. अब CBI मोबाइल डेटा, Telegram चैट, WhatsApp रिकॉर्ड और पैसों के लेन-देन की कड़ियों को जोड़ रही है. एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर NEET प्रश्नपत्र लीक का असली स्रोत कौन था और यह नेटवर्क कितने राज्यों तक फैला हुआ था. फिलहाल इस पूरे मामले ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. लाखों छात्रों और अभिभावकों की नजर अब CBI जांच और अदालत की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है.
 

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