पाकिस्तान में हो रहे अत्याचारों से तंग आकर भारत आए हिंदुओं में जैसलमेर की तत्कालीन कलेक्टर टीना डाबी के प्रति इतना सम्मान है कि यह विस्थापित आज भी पूर्व कलेक्टर डाबी को दुआएं और शुभकामनाएं देते नहीं थक रहे हैं. इनके दिलों में IAS टीना डाबी आज भी राज कर रही हैं.
इन हिंदू पाक विस्थापितों के जेहन में आज भी पूर्व कलेक्टर डाबी की ओर से उनके लिए किए गए पुनर्वास का कार्य आज भी जिंदा हैं, और तो और इनमें से एक ऐसा भी हिंदू पाकिस्तानी विस्थापित परिवार है, जो 20 साल पहले पाकिस्तान में अत्याचारों से तंग आकर भारत आया और जैसलमेर में रहकर इन विस्थापितों के हक के लिए लड़ाई लड़ रहा है.
महज हाई स्कूल तक पढ़े हुए पाक विस्थापित किशनराज भील जैसलमेर की पूर्व कलेक्टर टीना डाबी के कार्यों और उनकी वर्किंग स्टाइल पर फिदा हैं. उन्होंने पाकिस्तानी विस्थापितों की समस्या और उसके मर्म को लेकर एक किताब लिख डाली है. 'पुनर्वासी भील' नामक इस किताब पर कवर फोटो टीना डाबी का दिया है. मात्र 199 की कीमत पर 82 पेज की यह किताब अमेजन, फ्लिपकार्ट आदि पर भी उपलब्ध है.
गौरतलब है कि मई 2023 में जैसलमेर से 5 KM दूर अमरसागर तालाब के कैचमेन्ट एरिया में अवैध रूप से बसे हुए करीब 4 दर्जन से ज्यादा हिंदू पाकिस्तानी विस्थापितों को तत्कालीन जिला कलेक्टर टीना डाबी ने अतिक्रमण मानते हुए बेदखल किया था. इस मामले में टीना की काफी किरकिरी हुई थी. बाद में टीना डाबी ने डैमेज कंट्रोल करते हुए इन विस्थापितों को करीब 7 कि.मी. दूर मूलसागर में 40 बीघा जमीन अलॉट करके न केवल पुनर्वास किया, साथ ही उनके लिए खाने पीने के भी इंतजाम करवाए.
देश का संभवतः यह पहला मामला था जिसमें हिन्दू पाकिस्तानी विस्थापितों को बाकयदा राज्य सरकार के सहयोग से जिला प्रशासन की ओर से पुनर्वास किया गया. उसके बाद यह हिंदू पाकिस्तान विस्थापित तत्कालीन जिला कलेक्टर टीना डाबी की कार्यशैली पर फिदा हो गए और उन्हें खूब दुआएं दीं. और तो और जिस दिन इन विस्थापितों को पुनर्वास किया जा रहा था, उस दिन इन विस्थापितों ने टीना डाबी के लिए खूब पलक पावड़े बिछाए और उस समय टीना डाबी गर्भवती भी थीं, तो कई बुजुर्ग महिलाओं ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद तक भी दे दिया.
टीना डाबी के किए गए कार्यों से प्रभावित होकर पाकिस्तानी विस्थापित किशन राज भील ने एक किताब लिख डाली है- 'पुनर्वासी भील'
किताब का कवर फोटो पर बाकयदा टीना डाबी को छापकर उनको सम्मान दिया है. हालांकि, IAS टीना डाबी का कहना है कि उनसे किताब के कवर फोटो छापने के लिए परमिशन नहीं ली थी लेकिन किताब के लेखक किशन राज भील ने कहा कि हमने कवर फोटो छापने के लिए टीना मैडम से काफी सम्पर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क हो नहीं पाया, इस कारण हम उनसे अनुमति ले नहीं पाए. मगर हमारे दिल में उनके प्रति श्रद्धा और आस्था है. और हमने यह फोटो किताब के कवर पर छाप दिया. अब डाबी मैडम अगर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करती हैं तो उन्हें मंजूर है.
अब बात करें किताब की तो जैसलमेर के गजरूपसागर में पाकिस्तानी विस्थापितों की बस्ती में निवास कर रहे किशन राज भील ने बताया, वह पत्थर का काम करते हैं. उन्होंने 'पुर्नवासी भील' नामक एक पुस्तक लिखी है. 82 पृष्ठ और 6 अध्याय की इस पुस्तक में अखबारों की कटिंग के साथ ही तथ्यात्मक आंकड़ों, पाकिस्तान में हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचारों के साथ ही भारत में मिलने वाली सुविधाओं और यहां उनके लिए आने वाली कठिनाइयों का भी इस किताब में जिक्र किया है.
वहीं, इस किताब के मुख्य पृष्ठ पर उसने 2015 की UPSC टॉपर टीना डाबी का फोटो दिया है. किताब में मई 2023 में पाकिस्तान विस्थापितों की बस्ती पर उस समय जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए बुल्डोजर की कहानी और पुनर्वास की बातें भी लिखी हुई हैं.
इसके अलावा, पाकिस्तानी विस्थापितों को 'पुनर्वासी' शब्द कहने की बात को ज्यादा तवज्जो दी है. साथ ही किताब में पाकिस्तानी विस्थापितों के भारत आने वाली कई समस्याओं व पुनर्वास को लेकर भी वृतांत लिखा गया है.
किताब के लेखक किशन राज भील ने बताया कि हमारे पूर्वज तत्कालीन कारणों के चलते भले ही पाकिस्तान चले गए हों, लेकिन हमारा मूल जन्म स्थान जैसलमेर ही है और हमारा दिल आज भी भारत के लिए धड़कता है.
विमल भाटिया