राजस्थान: सरकारी स्वास्थ्य योजना में करोड़ों का घोटाला, डॉक्टर-लैब ऑपरेटर गिरफ्तार

जयपुर में राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ. SOG जांच में डॉक्टरों और लैब संचालकों की मिलीभगत सामने आई. मामले में दो को गिरफ्तार भी किया गया है. आरोपियों ने फर्जी प्रिस्क्रिप्शन, MRI रिपोर्ट और बढ़े हुए बिल दिखाकर सरकार से गलत तरीके से रिइम्बर्समेंट लिया.

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सरकार स्वास्थ्य योजनाओं में घोटाले के आरोप में 2 गिरफ्तार. (Photo: Representational ) सरकार स्वास्थ्य योजनाओं में घोटाले के आरोप में 2 गिरफ्तार. (Photo: Representational )

aajtak.in

  • जयपुर,
  • 05 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:01 AM IST

जयपुर में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने राजस्थान के सरकारी स्वास्थ्य योजना (RGHS) में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है. इस घोटाले में डॉक्टर और एक लैब ऑपरेटर शामिल हैं, जिन्होंने राज्य के खजाने को करोड़ों रुपये का वित्तीय नुकसान पहुंचाया है. पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (SOG) विशाल बंसल ने बताया कि ये अनियमितताएं RGHS के क्रियान्वयन की जांच के दौरान सामने आईं. इस बात की जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को दी. RGHS एक प्रमुख योजना है जिसका उद्देश्य आम जनता और सरकारी कर्मचारियों को मुफ्त और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है.

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मामले में डॉक्टर समेत 2 गिरफ्तार
अधिकारियों के अनुसार यह घोटाला कुछ डॉक्टरों और प्रयोगशाला संचालकों के बीच सांठगांठ के जरिए किया गया. इन लोगों ने फर्जी पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) और जांच रिपोर्ट तैयार करके राज्य सरकार से पैसे की वापसी (रीइम्बर्समेंट) का दावा किया. पुलिस ने बताया कि इस मामले के सिलसिले में दो आरोपियों- सीकर के SK अस्पताल में तैनात एसोसिएट प्रोफेसर (हड्डी रोग विशेषज्ञ) डॉ. कमल कुमार अग्रवाल और सीकर में एक निजी लैब के संचालक डॉ. बनवारी लाल उर्फ ​​बी. लाल- को गिरफ्तार किया गया है.

पुलिस ने बताया कि आरोपी डॉक्टरों ने मरीजों की जांच किए बिना, या उनकी गैर-मौजूदगी में भी, अनावश्यक जांचें (डायग्नोस्टिक टेस्ट) लिख दीं. जिनमें महंगे MRI स्कैन भी शामिल थे. इसके बाद भुगतान का दावा करने के लिए फर्जी रिपोर्ट तैयार की गईं और उन्हें RGHS पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया. अधिकारियों ने बताया कि कुछ मामलों में दावों की राशि बढ़ाने के लिए सामान्य MRI जांचों को गलत तरीके से "कॉन्ट्रास्ट MRI" के रूप में बिल किया गया. जबकि अन्य मामलों में, एक ही जांच के लिए कई रिपोर्टें तैयार करके अतिरिक्त दावों की मांग की गई.

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जांच में यह भी पता चला कि पर्चे उन दिनों जारी किए गए थे, जब संबंधित डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं थे. फर्जी दावों को पास कराने के लिए रिपोर्ट की तारीखों में हेरफेर किया गया था. एक मामले में 4 दिसंबर 2023 की तारीख वाली एक MRI रिपोर्ट को बदलकर 5 दिसंबर कर दिया गया, ताकि पैसे की वापसी मिल सके. जबकि उस दिन मरीज सीकर आया ही नहीं था. एक अन्य मामले में, किसी दूसरे अस्पताल में भर्ती मरीज के नाम पर दावे किए गए.

पुलिस ने मामला दर्ज कर शुरू की जांच
अधिकारियों ने आगे बताया कि कई मामलों में निजी डॉक्टरों द्वारा दिए गए रेफरल को इस तरह बदल दिया गया कि वे सरकारी डॉक्टरों द्वारा जारी किए गए प्रतीत हों, ताकि वे RGHS के तहत लाभ पाने के पात्र बन सकें. पुलिस ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग से मिली शिकायत के आधार पर एक मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है.

बंसल ने कहा कि इन धोखाधड़ी वाली हरकतों से न केवल राज्य को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है, बल्कि इससे असली लाभार्थियों पर भी बुरा असर पड़ा है और इस योजना की विश्वसनीयता को भी ठेस पहुंची है. पुलिस ने बताया कि अन्य डॉक्टरों और लैब कर्मचारियों की संलिप्तता का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है और दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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