साउथ दिल्ली की पॉश अमर कॉलोनी में हुए सनसनीखेज हत्याकांड में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है. रिपोर्ट में साफ हुआ है कि आईआरएस अधिकारी की 22 साल की बेटी की मौत गला दबाने से हुई. साथ ही शरीर पर कई चोटों के निशान मिले हैं, जो इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि पीड़िता ने हमले के दौरान काफी संघर्ष किया था.
एम्स दिल्ली के फॉरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता के अनुसार, शव के बाहरी परीक्षण में हाथों, पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों पर कई खरोंच और चोटें पाई गईं. चेहरे पर भी कई घाव और नाक की हड्डी में फ्रैक्चर मिला, जिससे यह संकेत मिलता है कि किसी भारी चीज से हमला किया गया था.
गर्दन की जांच के दौरान अंदरूनी मांसपेशियों में खून जमा हुआ पाया गया और थायरॉयड कार्टिलेज के दोनों हिस्सों में फ्रैक्चर मिला. इन सभी तथ्यों से स्पष्ट है कि मौत गला दबाने के कारण हुई. फॉरेंसिक जांच के लिए कई सैंपल सुरक्षित रखे गए हैं, जिनमें विसरा, नाखूनों के नमूने, खून और अन्य जरूरी सबूत शामिल हैं. दुष्कर्म की पुष्टि के लिए भी जांच जारी है. डॉक्टरों का कहना है कि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही इस पहलू पर स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की पुष्टि
इस बीच, आरोपी राहुल मीणा को लेकर भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं. अलवर जिले के राजगढ़ निवासी राहुल मीणा को दिल्ली पुलिस ने घटना के कुछ घंटों बाद द्वारका के एक होटल से गिरफ्तार किया था. पुलिस के अनुसार, राहुल पहले उसी घर में काम करता था, जहां यह घटना हुई. वह करीब आठ महीने तक वहां नौकरी कर चुका था और उसे घर के हर कोने की जानकारी थी.
जांच में सामने आया है कि घटना वाले दिन राहुल सुबह करीब साढ़े 6 बजे कॉलोनी में दाखिल हुआ और एक अतिरिक्त चाबी की मदद से घर में घुस गया. वह सीधे छत पर बने स्टडी रूम में पहुंचा, जहां पीड़िता सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही थी. आरोप है कि उसने पहले हमला किया, फिर मोबाइल चार्जिंग केबल से गला दबाया और किसी भारी चीज से हमला किया.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पीड़िता के बेहोश होने के बाद आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर उसे नीचे खींचकर ले गया. इसके बाद उसने लॉकर खोलने की कोशिश की और फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल किया. जब वह सफल नहीं हुआ, तो उसने स्क्रूड्राइवर से लॉकर तोड़ा और नकदी व जेवर लेकर फरार हो गया. बताया जा रहा है कि आरोपी ने अपने खून से सने कपड़े और चप्पल बदल लिए थे. सीसीटीवी फुटेज में वह सुबह करीब 7 बजकर 20 मिनट पर कॉलोनी से निकलता हुआ दिखाई दिया.
जुए की लत में डूबा आरोपी, लाखों रुपये हार चुका था
इस पूरे मामले में एक और अहम पहलू सामने आया है, जो आरोपी की पृष्ठभूमि से जुड़ा है. परिवार और पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि राहुल को मोबाइल पर जुआ खेलने की गंभीर लत थी. यह लत ही उसके पतन का कारण बनी. परिजनों के अनुसार राहुल पढ़ाई में काफी होशियार था. उसने 10वीं में 76 प्रतिशत और 12वीं में साइंस विषय से 90 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. लेकिन 12वीं के बाद वह ऑनलाइन गेम्स की तरफ आकर्षित हुआ. धीरे-धीरे उसने तीन पत्ती और लूडो जैसे गेम्स में पैसे लगाना शुरू कर दिया और यह आदत जुए में बदल गई.
इस लत के चलते राहुल लाखों रुपये हार चुका था. हालात इतने बिगड़ गए कि उसने अपनी मार्कशीट, मोबाइल फोन, बाइक और घर के अन्य सामान तक गिरवी रख दिए या बेच दिए. दिल्ली में नौकरी के दौरान भी वह दिनभर मोबाइल पर गेम खेलता रहता था और लगातार पैसे हारता जा रहा था. पैसों की कमी होने पर उसने आसपास के दुकानदारों और लोगों से उधार लेना शुरू कर दिया. जब वह उधार वापस नहीं कर पाया, तो लोगों से उसका विवाद होने लगा. इसकी शिकायत जब आईआरएस अधिकारी तक पहुंची, तो उन्होंने उसे नौकरी से निकाल दिया. नौकरी छूटने के बाद राहुल अपने गांव लौट आया, लेकिन वहां भी उसकी जुए की आदत जारी रही.
कुछ दिन पहले उसने ऑनलाइन गेम में पांच लाख रुपये जीते, लेकिन दोस्तों के कहने पर उनके फोन और आईडी से खेलने लगा और फिर पैसे हार गया. इसके बाद दोस्तों ने उस पर पैसे लौटाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया. इसी दबाव में उसने दिल्ली जाकर पैसे चोरी करने की योजना बनाई, जो आगे चलकर इस खौफनाक वारदात में बदल गई. दिल्ली की साकेत अदालत ने आरोपी राहुल मीणा को चार दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है. पुलिस का कहना है कि उसे क्राइम सीन पर ले जाकर पूरी घटना को दोहराना है और जांच के लिए उसे अलवर भी ले जाया जा सकता है.
अदालत ने आरोपी को 4 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा
परिजनों का कहना है कि उन्हें विश्वास नहीं था कि राहुल इतना बड़ा अपराध कर सकता है. उनके मुताबिक वह स्वभाव से शांत था, लेकिन पैसों को लेकर घर में झगड़ा करता था और सामान बेच देता था. परिवार ने यह भी कहा है कि अगर वह दोषी पाया जाता है, तो उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए. यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि ऑनलाइन जुए की लत किस तरह एक इंसान की पूरी जिंदगी को बर्बाद कर सकती है और उसे अपराध की तरफ धकेल सकती है.
हिमांशु शर्मा