भूख-प्यास से बिलखती मासूम को महिला कॉन्स्टेबल ने अपना दूध पिलाकर दी नई जिंदगी

बारां में दो महिला कॉन्स्टेबल ने ढाई माह की मासूम को अपना दूध पिलाकर उसकी जान बचाई. पुलिस ने बताया कि मासूम का पिता नशेड़ी है. ऐसे में महिला सिपाहियों के इस नेक काम की खूब तारीफ हो रही है.

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दो महिला कांस्टेबल ने अपना दूध पिलाकर बच्ची की जान बचाई (फोटो-आजतक) दो महिला कांस्टेबल ने अपना दूध पिलाकर बच्ची की जान बचाई (फोटो-आजतक)

राम प्रसाद मेहता

  • बारां,
  • 05 मई 2022,
  • अपडेटेड 5:20 PM IST
  • दो महिला कॉन्स्टेबल ने अपना दूध पिलाकर बचाई बच्ची की जान
  • पिता की गोद में घंटों से भूखी, प्यासी तड़प रही थी मासूम बच्ची

राजस्थान के बारां में भावुक कर देने वाला नजारा देखने को मिला, जहां ड्यूटी पर तैनात दो महिला कॉन्स्टेबल ने ढाई माह की बच्ची को अपना दूध पिलाकर उसकी जान बचाई. बच्ची का पिता नशेड़ी है और उसे तनिक भी अहसास नहीं हुआ कि मासूम भूख से बिलख रही है. ऐसे में महिला सिपाहियों ने मां बनकर उस बच्ची को नई जिंदगी दी.

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पुलिस ने बताया कि जिले की सारथल पुलिस ने बुधवार को शराबी पिता से ढाई माह की मासूम को मुक्त कराया, जो भूख-प्यास से तड़प रही थी. मासूम का पिता नशेड़ी है और उसका नाम राधेश्याम काथोड़ी है जो छीपाबड़ौद का रहने वाला है. वो अपने ससुराल गांव बंधा थाना कामखेड़ा से सुबह 4-5 बजे बच्ची को लेकर चुपचाप पैदल निकल गया. भूखी-प्यासी बच्ची अपने साथ नशे की हालत में वह पैदल 15 किलोमीटर दूर सालापुरा जा रहा था. इस दौरान मासूम की मां ने पुलिस को सूचना दी.

2 महिला कांस्टेबल ने अमृतपान कराकर बचाई मासूम की जान

 

थानाधिकारी महावीर किराड़ और एएसआई हरिशंकर नागर अपनी टीम कॉन्स्टेबल सुजान सिंह, अरविंद, रामनिवास, महिला कॉन्स्टेबल मुकलेश के बाबड़ के जंगल में तलाश के लिए रवाना हुए. जंगल की झाड़ियों में वह शख्स मिला, जिसके पास गर्मी से बेहाल भूखी-प्यासी ढाई माह की मासूम थी. नशे में धुत शख्स को बच्ची समेत थाना लाया गया. जहां बच्ची की नाजुक हालत देखते हुए महिला कॉन्स्टेबल मुकलेश और पूजा ने अपने आंचल का दूध पिलाकर मासूम की भूख मिटाई. 

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2 महिला कांस्टेबल ने अमृतपान कराकर बचाई मासूम की जान

 

महिला कॉन्स्टेबल मुकलेश और पूजा ने बताया कि बच्ची की हालत देखकर लगा कि वो घंटों से भूखी, प्यासी है. बच्ची के होंठ सूखे हुए थे. छोटी बच्ची को खाने के लिए कुछ नहीं दे सकते थे. हम दोनों के एक साल के बच्चे हैं, इसलिए बिना देर किए हम दोनों ने बारी-बारी बच्ची को स्तनपान कराया. ईश्वर की यही मर्जी थी और हमें इस पर गर्व है.. 

 


 

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