राजस्थान के धौलपुर जिले के सरमथुरा थाना इलाके के झिरी गांव में अवैध बजरी खनन का विरोध करना एक वन रक्षक को भारी पड़ गया. चंबल सेवर की नाका चौकी पर तैनात वन रक्षक जितेंद्र सिंह शेखावत को बुधवार देर रात अवैध चंबल बजरी से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली ने कुचल दिया था. ट्रैक्टर का पहिया उनके पैर के ऊपर से निकल गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे.
घायल हालत में उन्हें पहले सरमथुरा अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर करौली और फिर जयपुर के अपेक्स अस्पताल रेफर किया गया. डॉक्टरों ने जान बचाने के लिए उनका बायां पैर काट दिया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद शुक्रवार रात उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. वन रक्षक की मौत की खबर से वन विभाग में शोक की लहर दौड़ गई.
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नाका झिरी पर हुआ था हमला
क्षेत्रीय वन अधिकारी (वन्यजीव) देवेंद्र सिंह ने बताया कि 8 जनवरी की रात करीब साढ़े बारह बजे नाका झिरी रेन्ज के वनपाल बने सिंह ने फोन कर सूचना दी थी. उन्होंने बताया कि चंबल सेवर पर तैनात वन रक्षक जितेंद्र सिंह शेखावत को अवैध बजरी खनन माफियाओं ने ट्रैक्टर-ट्रॉली चढ़ाकर मारने की कोशिश की है.
सूचना मिलते ही अन्य वनकर्मी मौके पर पहुंचे और घायल वन रक्षक को अस्पताल पहुंचाया गया. मौके पर देखा गया कि उनका बायां पैर बुरी तरह कुचला हुआ था और वह बेहोशी की हालत में थे. इसके बाद उन्हें जयपुर रेफर किया गया, जहां शुक्रवार रात उनकी मौत हो गई.
आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी
इस मामले में सरमथुरा पुलिस थाने में अज्ञात ट्रैक्टर चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. पुलिस ने शनिवार को बजरी माफिया रामसेवक उर्फ चालू, निवासी चिल्ली पुरा, थाना बसईडांग, धौलपुर को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी पर आरोप है कि वह तेज रफ्तार से बजरी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ले जा रहा था और वन रक्षक को कुचलकर फरार हो गया था.
बजरी माफियाओं का बढ़ता आतंक
मृतक वन रक्षक जितेंद्र सिंह शेखावत कोटपूतली के रहने वाले थे. वह रिटायर्ड फौजी थे और बाद में वन विभाग में भर्ती होकर नाका झिरी रेन्ज में तैनात थे. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वैभव शर्मा ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और अन्य की तलाश जारी है.
बताया जा रहा है कि चंबल नदी के तटीय इलाकों में धड़ल्ले से बजरी खनन और परिवहन हो रहा है. बजरी माफियाओं का खौफ इतना है कि वे किसी को भी टक्कर मारने से नहीं चूकते, यहां तक कि पहले भी पुलिस को निशाना बनाया जा चुका है.
उमेश मिश्रा