'मेरे लिए मर गई', बेटी ने की पसंद की शादी, पिता ने छपवा दी शोक पत्रिका... मृत्युभोज करने जा रहा था परिवार, पुलिस ने रोका

Living Daughter Death Feast Rajasthan: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में एक पिता ने दूसरी जाति में विवाह करने वाली अपनी जीवित बेटी का मृत्युभोज आयोजित करने का फैासला लिया, जिसे पुलिस के हस्तक्षेप के बाद रद्द करना पड़ा.

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जिंदा बेटी का 'तीये की बैठक'.(Photo:ITG) जिंदा बेटी का 'तीये की बैठक'.(Photo:ITG)

प्रमोद तिवारी

  • भीलवाड़ा ,
  • 24 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:38 PM IST

राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के आमल्दा गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक पिता ने अपनी जीवित बेटी के अंतर्जातीय युवक से प्रेम विवाह कर लेने से बेटी को मृत मानते हुए उसका शोक संदेश छपवा कर शोक बैठक रख जीवित बेटी का मृत्यु भोज करने की कार्यक्रम तय कर दिया. 

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी धर्मेंद्र सिंह ने पिता को मृत्युभोज नहीं करने और बैठक नहीं रखने के निर्देश दिए. इसके बाद पिता ने मृत्युभोज नहीं करने का निर्णय लेते हुए प्रस्तावित बैठक भी समाप्त कर दी है.

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पढ़ने गई थी जयपुर, चुन लिया जीवनसाथी
   
शक्करगढ़ थाना इलाके के आमल्दा निवासी देवेंद्र सिंह कानावत ने अपनी बेटी को पढ़ाई के लिए जयपुर भेजा था. परिवार को उम्मीद थी कि वह पढ़-लिखकर परिवार और समाज का नाम रोशन करेगी. लेकिन बेटी ने परिवार की इच्छा के खिलाफ अन्य समाज के एक युवक के साथ संबंध बना लिए.

जब पुलिस दोनों को थाने लेकर आई, तब पिता ने बेटी को घर लौटने के लिए काफी समझाया. यहां तक कि उन्होंने उसके सामने हाथ जोड़कर और झोली फैलाकर भी मिन्नतें कीं, लेकिन युवती अपने फैसले पर अडिग रही.

शक्करगढ़ थानाधिकारी पूरणमल मीणा के अनुसार, युवती ने युवक के साथ रहने की इच्छा जताई है और दोनों ने पुलिस से सुरक्षा की मांग भी की है.

मृत्युभोज की घोषणा

इसी के बाद पिता देवेंद्र सिंह कानावत ने बेटी को त्यागते हुए उसका शोक संदेश छपवा दिया, जिसमें 22 मार्च को तीये की बैठक और 31 मार्च को ब्रह्मभोज की घोषणा की गई थी.

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पुलिस की कार्रवाई 

हालांकि, बाद में पीड़िता की शिकायत पर एसपी के निर्देश पर शक्करगढ़ थाने में पिता देवेंद्र सिंह कानावत के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की गई. इसके बाद प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए पिता ने मृत्युभोज और बैठक का कार्यक्रम रद्द कर दिया.

पिता की वेदना
            
पिता देवेंद्र सिंह कानावत का कहना है कि यह एक दुखी पिता की वेदना है. उन्होंने कहा कि जिस क्षत्रिय कुल में उनका जन्म हुआ है, उसकी मान-मर्यादा को देखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया. उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि मोबाइल की लत से बाहर निकलकर अच्छा ज्ञान प्राप्त करें और अपने माता-पिता का सम्मान बनाए रखें.

सामाजिक बहस
             
वहीं, ग्रामीण शिवराज मीणा का कहना है कि यह केवल आमल्दा गांव की नहीं, बल्कि पूरे देश के कई गांवों में सामने आने वाली समस्या है. माता-पिता अपने बच्चों को बड़ी उम्मीदों के साथ पढ़ाते-लिखाते हैं, लेकिन कई बार युवा गलत रास्ता चुन लेते हैं.
             
परिजनों ने भी कहा कि उन्हें संविधान से कोई आपत्ति नहीं है और वे उसका सम्मान करते हैं, लेकिन समाज के कुछ सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्य भी हैं जिन्हें बचाना आवश्यक है. उनका मानना है कि माता-पिता की सहमति के बिना होने वाले ऐसे विवाहों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए.
             
यह पूरा मामला अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और समाज में बदलते सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक अपेक्षाओं को लेकर बहस भी छिड़ गई है.

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