'अजमेर शरीफ दरगाह पहले शिव मंदिर था', कोर्ट में याचिका दायर कर ASI सर्वे की मांग

अजमेर दरगाह के पहले शिव मंदिर होने का दावा करते हुए महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने जिला अदालत में याचिका दायर की. याचिका में एएसआई द्वारा सर्वे की मांग की गई है. 2024 में हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने भी इसी तरह की याचिका दी थी. अजमेर दरगाह ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का प्रमुख मुस्लिम तीर्थस्थल है, जिसे मुग़ल सम्राट हुमायूँ ने बनवाया था.

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अजमेर शरीफ दरगाह. (File Photo: ITG) अजमेर शरीफ दरगाह. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • जयपुर,
  • 12 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:39 PM IST

अजमेर की एक जिला अदालत में याचिका दायर की गई है, जिसमें दावा किया गया है कि अजमेर दरगाह मूल रूप से एक शिव मंदिर था और इसके सर्वे की मांग की गई है. यह याचिका महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने दायर की.

याचिकाकर्ता का क्या है दावा?
राजवर्धन सिंह परमार ने कहा, "अजमेर दरगाह पहले शिव मंदिर था और बाद में इसे दरगाह में बदल दिया गया. मैं लंबे समय से इस मुद्दे पर संघर्ष कर रहा हूं. पहले भी राष्ट्रपति को याचिका दी गई थी, जिसे राजस्थान के मुख्य सचिव को भेजा गया." उन्होंने एएसआई द्वारा सर्वे की भी मांग की है.

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क्या है कानूनी प्रक्रिया?
वरिष्ठ वकील ए. पी. सिंह ने बताया कि यह याचिका आज अजमेर में जिला न्यायाधीश के न्यायालय में दाखिल की गई. उन्होंने दावा किया कि यह स्थल प्राचीन काल में भगवान शिव को समर्पित मंदिर था.

2024 में हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने भी इसी तरह की याचिका दायर की थी. उन्होंने दरगाह को हिंदू मंदिर घोषित करने की मांग की थी.

क्या है अजमेर शरीफ दरगाह का इतिहास?
अजमेर शरीफ दरगाह भारत के प्रमुख मुस्लिम तीर्थस्थलों में गिना जाता है और अजमेर का प्रसिद्ध स्थल भी है. ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती फारस के सूफी संत थे. उन्होंने 1192 से 1236 ईस्वी तक अजमेर में निवास किया. मुग़ल सम्राट हुमायूं ने संत की स्मृति में यह दरगाह बनवाई और यहां उनका मकबरा स्थित है. अकबर और शाहजहां ने शासनकाल में दरगाह परिसर में मस्जिदें बनवाईं.

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