4 मई को बंगाल चुनाव के नतीजों का एलान हुआ, नतीजे आते ही सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद बंगाल में चुनावी हिंसा का पुराना पैटर्न जारी है. आज बंगाल की कानून व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि बीते दिन बंगाल सीएम के बड़े दावेदार और बीजेपी के सीनियर नेता शुभेंदु अधिकारी के पीए की हत्या कर दी गई. 9 मई को शपथग्रहण से पहले बेखौफ कातिलों ने बंगाल की शांति पर ग्रहण लगा दिया. अब सवाल यही है कि बंगाल की राजनीति के रक्तचरित्र पर लगाम कब लगेगी. क्या बंगाल में बदलाव नहीं बल्कि बदले की सियासत चलती रहेगी.