करीब चार आने खर्च कर चार आने की कमाई जब होती थी तब हिन्दुस्तान आजादी की खुशबू से सराबोर था. करीब 31 करोड़ की जनसंख्या में 21 करोड़ खेती पर टिके थे और पकौड़े या परचून के आसरे जीने वालों की तादाद 50 से 80 लाख परिवारों की थी. अब ठेले के अलावे दो सौ रुपये लगाकार दो सौ रुपये की कमाई करने वाला मौजूदा हिन्दुस्तान विकास के अनूठे नारों से सराबोर है. सवा सौ करोड़ की जनसंख्या में 50 करोड़ खेती पर टिके हैं और पकौड़े या परचून के आसरे जीने वालों की तादाद 10 से 12 करोड़ परिवारों की है. तो आजादी के 71वें बरस में बदला क्या या आजादी के 75वें बरस यानी 2022 में क्या बदलेगा?