अब से कुछ देर पहले तक पूरी दुनिया की नजरें 24 मार्च की सुबह पर टिकीं थीं. दुनिया ये देखना चाहती थी कि कल की सुबह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह खुल जाएगा या फिर अमेरिका ईरान की बिजली सप्लाई ध्वस्त कर देगा. क्योंकि इसकी खुली चेतावनी ट्रंप ने ईरान को दी थी, और इसके लिए 48 घंटे का वक्त भी दिया था, जो 24 मार्च को सुबह सवा 5 बजे पूरा होने वाला था. लेकिन अपने 'वचन' को पूरा करने से ठीक 12 घंटे पहले ट्रंप ने इतना 'शार्प यू-टर्न' लिया कि पूरा दुनिया देखती रह गई. और लौट के ट्रंप 'सीजफायर' पर आ गए? उन्होंने कहा कि अब अमेरिका अगले 5 दिन तक ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले नहीं करेगा. और इसके पीछे उन्होंने इतना जबरदस्त तर्क दिया कि सब सोचने पर मजबूर हो गए कि आखिर ये है क्या? 48 घंटे पहले ईरान के पावर प्लांट्स को तबाह करने की धमकी देने वाले ट्रंप कह रहे हैं कि पिछले दो दिन यानि 48 घंटे से ईरान और अमेरिका के बीच बहुत अच्छी बातचीत चल रही है. अब ये खुद ट्रंप ही जानें कि उनकी कौनसी बात सच है और कौनसी झूठ? हालांकि ईरान ने कहा है कि उसकी अमेरिका से कोई बात नहीं हुई है. ना ही डायरेक्ट और ना ही किसी तीसरे देश के जरिये? अब सवाल ये है कि ट्रंप आखिर 12 घंटे पहले अचानक 120 घंटे क्यों मांगने लगे. वो अचानक से 5 दिन की मोहलत पर आकर क्यों टिक गए? और उन्होंने ईरान को 5 दिन की मोहलत दी है. या युद्ध की तैयारियों और अगली रणनीति के लिए 5 दिन की मोहलत ली है? आपको बता दें कि एक दिन पहले ईरान ने इजरायल के सीक्रेट न्यूक्लियर प्लांट डिमोना पर जबरदस्त हमला किया. कहा जा रहा है कि इस हमले ने ट्रंप को हिलाकर रख दिया और वो अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर हो गए हैं.