आज सबसे पहले हम आपको ये बताएंगे कि क्या ट्रंप अपने असली 'मकसद' पर लौट आए हैं? और क्या उन्होंने ये पूरा युद्ध उस एक 'मकसद' के लिए ही लड़ा था? ये मकसद है 'तेल'. यानि दुनिया में जहां भी तेल होगा, वहां अमेरिका होगा. क्योंकि ट्रंप को तेल पसंद है. वास्तव में ईरान की न्यूक्लियर साइट यूरेनियम एनरिचमेंट तो एक बहाना या शिगूफा था. जो ईरान पर हमले के लिए छोड़ा गया. ट्रंप को तो वेनेजुएला की तरह ईरान के तेल पर कब्जा करना था. और अब उनका ये मकसद उनकी जुबान पर आ चुका है. उन्होंने साफ कहा कि ईरान का तेल उनकी पसंदीदा चीज है. उन्होंने यहां तक कहा कि हो सकता है कि अब वो इसके लिए ईरान के खार्ग द्वीप पर कब्जा कर लें. जहां से ईरान तेल का 90% व्यापार करता है. और जिस वक्त ट्रंप खार्ग द्वीप और ईरान के तेल पर कब्जा करने की बात कह रहे हैं तब अमेरिका के साढ़े 3 तीन हजार मरीन्स के साथ युद्धपोत USS Tripoli ऑपरेशनल जोन में पहुंच चुका है.