रबर स्टांप नहीं हैं बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन, नरेंद्र मोदी ने यूं ही नहीं कहा ‘बॉस‘

बीजेपी अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन को कमजोर समझने वाले मुगालते में हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनको अगर बॉस कहा और अपना नेता माना है तो जाहिर है कि इसके पीछे कुछ कारण हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन दिल्ली में पार्टी हेटक्वार्टर पर. ( PTI) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन दिल्ली में पार्टी हेटक्वार्टर पर. ( PTI)

संयम श्रीवास्तव

  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:18 PM IST

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर नितिन नवीन की ताजपोशी हो चुकी है. BJP संविधान (Bharatiya Janata Party Constitution) के अनुसार यह पार्टी का सर्वोच्च संगठनात्मक प्रमुख होता है. अध्यक्ष पार्टी की रीढ़, निर्णय लेने वाला और चुनावी कमांडर होता है. पर कुछ लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के विराट व्यक्तित्व के आगे नितिन नबीन क्या फैसले ले पाएंगे? शायद यही कारण है कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के सामने बीजेपी अध्यक्ष नबीन को बॉस कहकर संबोधित किया. मोदी के हर कदम में भविष्य की झलकियां होती हैं.

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मोदी ने नबीन को बॉस बोलकर आम कार्यकर्ताओं को संदेश दे दिया कि बीजेपी में कोई भी कार्यकर्ता छोटा नहीं होता है. और इसी बात को आगे बढ़ाते हुए पार्टी अध्यक्ष के रूप में पहला भाषण देते हुए नबीन कहा कि सभी कार्यकर्ता और मंडल स्तर पर काम कर रहे नेता यह विश्वास रखें कि पार्टी का वॉच टावर उन पर बारीकी से नजर रखे हुए है. यदि मुझ जैसा कार्यकर्ता पार्टी का अध्यक्ष बन सकता है तो आप भी बन सकते हैं. भाजपा के पास करोड़ों की संख्या में कार्यकर्ता हैं. और यही पार्टी की जिम्मेदारी संभालते हैं, और वे पार्टी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी हैं. उनके मोटिवेट रखना. हालांकि, बड़ी हद तक उनमें ऊर्जा भरने का काम पार्टी की विचारधारा करती है. लेकिन, अंत में प्रमोशन तो सबको चाहिए. नबीन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यही है कि वे कार्यकर्ताओं के बीच जाएं और ये बताएं कि वे अध्यक्ष बने हैं, पीएम मोदी प्रधानमंत्री और अमित शाह गृहमंत्री तो इनमें से कोई भी पैराशूट से नहीं आया है. भाजपा एक कार्यकर्ता की पार्टी है और इस कैंपेन के नए ब्रांड एम्बेसेडर हैं नितिन नबीन

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बीजेपी अध्यक्ष की कुर्सी कितनी पावरफुल

BJP संविधान (Bharatiya Janata Party Constitution) के अनुसार अध्यक्ष पार्टी का सर्वोच्च संगठनात्मक प्रमुख होता है. अध्यक्ष पार्टी की रीढ़, निर्णय लेने वाला और चुनावी कमांडर होता है. यह पद रबर स्टांप नहीं, बल्कि पार्टी को दिशा देने, कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने की असली शक्ति रखता है. बीजेपी अध्यक्ष की कुर्सी कितनी पावरफुल होती है वो इसकी शक्तियों से समझा जा सकता है.

 राष्ट्रीय अध्यक्ष पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी (120 सदस्यों तक) का प्रमुख होता है. अध्यक्ष ही सदस्य नामांकित करता है. महासचिव, कोषाध्यक्ष, उपाध्यक्ष आदि की नियुक्त करता है. राज्य इकाइयों (प्रदेश अध्यक्ष) की नियुक्ति/हटाने में निर्णायक भूमिका होती है.

लोकसभा/विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों की अंतिम सूची भी तय करता है. अमित शाह (2014-19) ने अध्यक्ष रहकर 282-303 सीटों की जीत की रणनीति बनाई.इसके अलावा उसे पार्टी संविधान की व्याख्या, संशोधन और नियम बनाने का अधिकार भी है. वह राष्ट्रीय परिषद/कार्यकारिणी की बैठकें बुलाता है, एजेंडा तय करता है. 

करोड़ों कार्यकर्ताओं को मोबलाइज करता है, सदस्यता अभियान चलाता है. पार्टी फंड्स, दान और खर्च पर देखरेख भी करता है. इसके अलावा वो पार्टी की रैलियां, मीडिया, NDA सहयोगियों से समन्वय आदि का जिम्मेदारी भी निभाता है. PM मोदी ने नितिन नबीन को मेरा बॉस कहा, जो संगठन में अध्यक्ष की सर्वोच्चता को ही दिखाता है.

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नितिन नबीन की राजनीतिक काबिलियत 

नितिन नबीन का अब तक का राजनीतिक करियर कई ऐसे पुराने उदाहरण हैं जो उनकी संगठनात्मक क्षमता, दृढ़ता और संकटकाल में फैसले लेने की ताकत को साबित करते हैं. बिहार की राजनीति जातिगत समीकरण सबसे बड़ी चीज होती . पर जिस कायस्थ जाति से वे आते हैं उनकी हिस्सेदारी नगण्य (.60 प्रतिशत) के करीब ही है. 

इसके बावजूद वो लगातार चुनाव जीतते रहे हैं. इसके साथ ही मंत्रिमंडल में भी जगह बना रहे हैं. पिता नवीन किशोर सिन्हा की अचानक मौत के बाद पार्टी और परिवार संकट में था. पढ़ाई बीच में छोड़कर उन्होंने मात्र  26 वर्ष की अवस्था में पटना वेस्ट (अब बांकीपुर) से बाई-इलेक्शन लड़ा और भारी मतों से जीत हासिल की. लगातार 5 बार विधायक बने (2006, 2010, 2015, 2020, 2025) .जिसमें 2020 में लव सिन्हा (शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे) को 84,000 वोटों से हराया और पुष्पम प्रिया चौधरी भी हारीं. राजनीतिक उथल-पुथल (महागठबंधन से NDA) के बावजूद स्थिरता बनाए रखी, जो उनके ग्रासरूट कनेक्शन और लोकल मुद्दों पर पकड़ को दर्शाता है.

भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के बिहार अध्यक्ष रहते हुए राष्ट्रीय स्तर पर काम किया, जैसे नेशनल यूनिटी यात्रा (J&K) और गुवाहाटी-तवांग मार्च. बिहार सरकार में रोड कंस्ट्रक्शन, अर्बन डेवलपमेंट एंड हाउसिंग जैसे पोर्टफोलियो संभाले. COVID-19 संकट में अर्बन डेवलपमेंट मंत्री के रूप में राहत कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में तेजी लाई. 

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NDA सरकारों में मंत्री रहते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर फोकस किया, जैसे सड़कें और शहरी सुविधाएं, जो बिहार की चुनौतियों (बाढ़, गरीबी) से निपटने में मददगार साबित हुए. कांग्रेस नेता अब्दुल जलील मस्तान के खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज करवाया, जब उन्होंने PM मोदी की तस्वीर अपमानित करने की बात कही. 

नबीन बीजेपी को नए नेतृत्व मॉडल की ओर ले जाएंगे

देश में एक बात लोगों को घर बैठ गई है कि देश में  राजनीति में आगे बढ़ने के लिए धन शक्ति, मसल शक्ति आदि की जरूरत होती है. नितिन नबीन के रूप में बीजेपी में एक ग्रासरूट-केंद्रित और विवादरहित चेहरा आगे आया है. अल्प संख्या वाली कायस्थ जाति का होने से उन पर जातिगत राजनीति करने का भी आरोप फिट नहीं बैठता है. उनकी सफलता लोकल मुद्दों, संगठनात्मक काम और सादगी पर टिकी है, न कि जातीय संख्या पर. उन पर कभी भी किसी भी तरह का भ्रष्टाचार, पक्षपात या भाई-भतीजावाद का आरोप नहीं लगा है.

राजनीतिक जीवन में वे साफ-सुथरी छवि रखते हैं.कोई घोटाला या व्यक्तिगत लाभ का केस नहीं है. यहां तक कि बीजेपी के धुर विरोधी RJD के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने भी उनकी तारीफ की है. दिसंबर 2025 में नवीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर तिवारी ने कहा कि वे बहुत ही सौम्य, सरल स्वभाव के और कर्मठ नेता हैं. RJD जैसे विरोधी दल के नेता द्वारा ऐसी प्रशंसा दुर्लभ है, जो नबीन की क्रॉस-पार्टी स्वीकार्यता और साफ छवि को प्रमाणित करती है. नबीन बीजेपी को नए नेतृत्व मॉडल की ओर ले जाएंगे. युवा, मेरिट-बेस्ड, विवादरहित और कार्यकर्ता-केंद्रित.

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