पूर्व आर्मी चीफ मनोज नरवणे की विवादित किताब Four Stars Of Destiny से जुड़े दो ट्वीट्स एक-दूसरे से टकरा रहे हैं. पहला ट्वीट दिसंबर 2023 का है. जनरल मनोज नरवणे ने लिखा, 'हैलो फ्रेंड्स. मेरी किताब अब उपलब्ध है. लिंक फॉलो करो. हैप्पी रीडिंग. जय हिंद.' उनके पोस्ट में किताब का कवर और अमेजन का लिंक था. लोग प्री-ऑर्डर कर रहे थे. दूसरा ट्वीट फरवरी 2026 का है. पेंग्विन इंडिया ने कहा 'किताब प्रकाशन की प्रक्रिया में नहीं गई है. कोई प्रिंट या डिजिटल कॉपी जारी नहीं की गई. जो भी घूम रही है, वह कॉपीराइट उल्लंघन है.'
राहुल गांधी संसद में किताब का हार्डकॉपी दिखा रहे हैं. वे कह रहे हैं 'नरवणे जी ने 2023 में ट्वीट किया था कि किताब उपलब्ध है. अमेजन पर प्री-ऑर्डर था. मैं नरवणे जी पर भरोसा करूंगा.' लेकिन वे 2023 के प्री-ऑर्डर स्टेज को 'किताब छप गई' समझ रहे हैं. वो स्टेज सिर्फ लिस्टिंग का था. असल छपाई बाद में होती है. क्लियरेंस न मिलने से छपाई रुक गई. राहुल ने पुरानी बात को अंतिम सच्चाई मान लिया.
दिल्ली पुलिस की एफआईआर से बढ़ गया विवाद
दिल्ली पुलिस ने स्पेशल सेल में एफआईआर दर्ज की है. मामला है अनऑथोराइज्ड कॉपी के सर्कुलेशन का. पीडीएफ वर्जन व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर घूम रहा था. पुलिस कह रही है कि ये किताब का प्री-प्रिंट वर्जन है, जो पेंग्विन के पास था. किसी ने इसे लीक किया है. पुलिस इसे कॉपीराइट चोरी और सेंसिटिव जानकारी का प्रसार मान रही है.
सोमवार रात पेंग्विन ने सफाई दी कि हमने किताब प्रकाशित नहीं की है. न प्रिंट और न ही डिजिटल. इसकी कोई कॉपी जारी नहीं की है. जो भी घूम रही है, वो कॉपीराइट का उल्लंघन और चोरी है. हम कानूनी कार्रवाई करेंगे. पेंग्विन के पास एक्सक्लूसिव राइट्स हैं. वे किताब छाप नहीं सकते क्योंकि क्लियरेंस पेंडिंग है.
ये हैं 2023 का जनरल नरवणे का ट्वीट-
और फिर बीती रात आई पैंग्विन की सफाई-
क्या है किताब छपने की प्रोसेस
लेखक मैनुस्क्रिप्ट देता है. पब्लिशर एडिटिंग करता है. कवर बनता है. फिर आईएसबीएन नंबर लेता है. उसके बाद अमेजन-फ्लिपकार्ट पर लिस्टिंग होती है. प्री-ऑर्डर शुरू हो जाते हैं. पैसे जमा होते हैं. लेकिन असल छपाई आखिरी स्टेज पर होती है. अगर कोई अड़चन आए तो लिस्टिंग हटा दी जाती है. पैसे रिफंड कर दिए जाते हैं. नरवणे की किताब इसी स्टेज पर अटकी है. पूरी प्रक्रिया को पैंग्विन ने मंगलवार को x पर पोस्ट करके समझाया-
ISBN नंबर की अहमियत- ISBN यानी इंटरनेशनल स्टैंडर्ड बुक नंबर. यह किताब की पहचान का 13 डिजिट वाला यूनीक आईडी नंबर होता है. पब्लिशर राष्ट्रीय एजेंसी से लेता है. मैनुस्क्रिप्ट एडिटिंग के बाद ले लिया जाता है. छपाई से पहले. आईएसबीएन मिलने से किताब 'अनाउंस्ड' हो जाती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किताब छप गई और बाजार में है. नरवणे की किताब का आईएसबीएन 9780670099757 है. 2023 में ही मिल गया था. इसलिए अमेजन पर लिस्टिंग दिखी. लेकिन छपाई नहीं हुई.
अमेजन पर प्री-ऑर्डर का मतलब
प्री-ऑर्डर का मतलब किताब छप गई, ऐसा नहीं. कई किताबें साल भर पहले लिस्ट हो जाती हैं. पैसे ले लिए जाते हैं. अगर देरी हो तो रिफंड कर दिया जाता है. नरवणे की किताब का प्री-ऑर्डर 2023 में शुरू हुआ था. बाद में कैंसल हो गया. लिस्टिंग हटा दी गई. जो लोग कह रहे हैं 'अमेजन पर थी', वे सही कह रहे हैं. लेकिन वो सिर्फ लिस्टिंग थी, किताब नहीं.
सैन्य अफसर के लिए किताब छापने के नियम क्या हैं
सर्विंग ऑफिसर को किताब छापने के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट की परमिशन लेनी पड़ती है. आर्मी रूल्स 1954 का सेक्शन 21 कहता है. रिटायर्ड ऑफिसर पर ये नियम लागू नहीं होता. लेकिन ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट 1923 जीवन भर लागू रहता है. संवेदनशील जानकारी नहीं छाप सकते. 2021 में पेंशन रूल्स में बदलाव आया. इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशन के रिटायर्ड लोगों को क्लियरेंस लेना पड़ता है. आर्मी इसमें शामिल नहीं है, लेकिन प्रैक्टिस में आर्मी चीफ जैसे बड़े ऑफिसर मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस को मैनुस्क्रिप्ट दिखाते हैं. इसी सिलसिले में नरवणे की बुक पेंग्विन ने क्लियरेंस के लिए भेजी, जो 2024 से पेंडिंग है.
किताब के न छपे होने की बात क्यों ज्यादा भरोसेमंद
पेंग्विन पब्लिशर है. वे किताब छापने वाले हैं. अगर क्लियरेंस नहीं मिला तो वे प्रिंटिंग नहीं करेंगे. नुकसान उनका होगा. नरवणे ने 2023 में सिर्फ अनाउंसमेंट किया था. तब क्लियरेंस की प्रक्रिया चल रही थी. अब 2026 में पेंग्विन कह रही है कि किताब प्रकाशन स्टेज पर नहीं पहुंची. लीक हुई कॉपी प्री-प्रिंट टाइपसेट है. दिल्ली पुलिस भी यही जांच कर रही है. इसलिए सच्चाई यही है कि किताब अभी छपी नहीं है. जो कॉपी घूम रही है, वो चोरी का माल है. लीगल और ऑथेंटिक नहीं.
राहुल गांधी से कहां चूक हुई
वे पुराने ट्वीट को अंतिम सच्चाई मान रहे हैं. लेकिन प्रकाशन की दुनिया में 'उपलब्ध' (available) का मतलब प्री-ऑर्डर लिंक होता है. असल उपलब्धता तब होती है जब किताब छपकर दुकान पर आ जाए. क्लियरेंस न मिलने से वो स्टेज कभी आया ही नहीं. सरकार कह रही है कि किताब में गलवान, राजनीतिक फैसले जैसे संवेदनशील मुद्दे हैं. इसलिए क्लियरेंस रुका है. राहुल गांधी इसे सच्चाई दबाने की साजिश बता रहे हैं. लेकिन असल में नियम और सुरक्षा का मामला है.
यदि किताब को क्लीयरेंस मिल जाता तो वह मई 2024 में छप जाती. अमेजन पर डिलीवरी शुरू हो जाती. कोई विवाद नहीं होता. लेकिन क्लियरेंस पेंडिंग है. इसलिए पेंग्विन ने छापना रोक दिया. नरवणे भी इंतजार कर रहे हैं. लीक हुई कॉपी से विवाद बढ़ गया. ये कंट्रोवर्सी अब किताब के कंटेंट से ज्यादा प्रकाशन की प्रक्रिया और क्लियरेंस के नियमों पर है. नरवणे ने सही कहा था – 2023 में किताब 'उपलब्ध' थी, यानी प्री-ऑर्डर पर. पेंग्विन सही कह रही है कि वो आज तक छपी नहीं. राहुल गांधी ने बीच का गैप नहीं देखा. दिल्ली पुलिस लीक की जांच कर रही है. पेंग्विन कॉपीराइट बचाने की कोशिश कर रही है.
किताब छपेगी या नहीं, ये क्लियरेंस पर निर्भर है. फिलहाल वो अनपब्लिश्ड है. जो भी पढ़ रहे हैं, वो अनऑथराइज्ड कॉपी पढ़ रहे हैं.
धीरेंद्र राय