कंफ्यूजन या रणनीत‍ि... ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप बार-बार अपने बयानों से पलट क्‍यों रहे हैं

ईरान पर हमले को लेकर सबसे बड़ा सिरदर्द है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बातों और उनके नजरिये को समझना. पिछले दस दिनों से ट्रंप ने इस जंग को लेकर जितनी बातें की हैं, उसे उन्होंने खुद ही काट दिया है. अभी तक वे यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि उन्होंने ईरान पर हमला क्यों किया, अब वे क्या चाहते हैं और किन हालात में यह जंग बंद होगी.

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ईरान जंग को लेकर ट्रंप जो बयानों की जलेबी बना रहे हैं, वह मिडिल ईस्ट में कई लोगों के लिए जानलेवा हो रहा है. (Photo: Reuters) ईरान जंग को लेकर ट्रंप जो बयानों की जलेबी बना रहे हैं, वह मिडिल ईस्ट में कई लोगों के लिए जानलेवा हो रहा है. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:53 PM IST

28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद सबसे पहले यही कहा गया कि यह एक प्रिएम्प्टिव स्ट्राइक है. बाद में बताया गया कि यह ईरान की टॉप लीडरशिप को खत्म करने के लिए की गई ‘डीकैपिटेशन’ स्ट्राइक थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐसी उलट-पुलट बयानबाजी के अकेले सोर्स बने हुए हैं. 

ईरान पर हालिया हमलों (ऑपरेशन एपिक फ्युरी) को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बयानों में काफी उतार-चढ़ाव दिखा है. कभी वो इसे 'लोकतंत्र की जीत' बताते हैं, तो कभी इसे अपनी 'निजी सुरक्षा' से जोड़ देते हैं. पिछले दस दिनों में ट्रंप कभी हमले के पीछे ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम को अमेरिका के लिए खतरा बताते हुए जंग में उतरने की बात करते हैं. तो कभी पर्सनल रीजन देते हुए कहते हैं कि खामेनेई मेरी जान लेना चाहते थे, इसलिए मैंने उसे मरवा दिया. और इन सबके अलावा ईरान में रिजीम चेंज तो उनका पसंदीदा टॉपिक है ही.

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कभी वे कहते हैं कि ईरान युद्ध कुछ हफ्तों की बात है, तो कभी कहते हैं कि वे अनिश्चित काल तक लड़ने के लिए तैयार है. कभी वो इस युद्ध का क्रेडिट अपनी लीडरशिप को देते हैं, तो कभी कहते हैं कि उन्हें नेतान्याहू के कारण ईरान पर हमला करना पड़ा है.

ट्रंप के प्रमुख बयान, फिर उनकी गुलाटियां...

24 फरवरी, 2026 (स्टेट ऑफ द यूनियन): ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ऐसे मिसाइल बना रहा है जो जल्द ही हमारे 'ब्यूटीफुल अमेरिका' तक पहुंच सकते हैं. उन्होंने इसे एक 'बड़ा खतरा' बताया.

28 फरवरी, 2026 (Truth Social): हमले के तुरंत बाद उन्होंने लिखा, 'हम उनकी मिसाइल पावर को मिट्टी में मिला देंगे.' इसी दिन उन्होंने ईरान की जनता से अपनी सरकार के खिलाफ खड़े होने (रिजीम चेंज) की अपील की.

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1 मार्च, 2026 (ABC न्यूज इंटरव्यू): ट्रंप ने एक निजी कारण जोड़ते हुए कहा, 'उसने (खामेनेई) मुझे मारने की कोशिश की थी, इसलिए मैंने उसे पहले ही खत्म कर दिया.' उन्होंने 2024 के कथित हत्या के प्रयासों को हमले की वजह बताया.

2 मार्च, 2026 (Daily Mail इंटरव्यू): युद्ध की अवधि पर बात करते हुए कहा, 'यह चार हफ्ते या उससे कम का प्रोसेस है.'

2 मार्च, 2026 (देर रात Truth Social): कुछ ही घंटों बाद सुर बदल गया. उन्होंने लिखा कि अमेरिका के पास हथियारों का 'असीमित भंडार' है और हम 'हमेशा के लिए' (Forever) युद्ध लड़ सकते हैं.

3 मार्च, 2026: 'युद्ध हमेशा के लिए चल सकता है'
बयान: ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'अमेरिका के पास हथियारों का असीमित भंडार है. यह युद्ध 'हमेशा के लिए' (Forever) लड़ा जा सकता है और हम जीतेंगे.'

विवाद: इसी दिन जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वह फिर से 'अंतहीन युद्धों' में अमेरिका को फंसा रहे हैं, तो उन्होंने इसे 'सेफ्टी डिटूर' (सुरक्षा के लिए लिया गया छोटा रास्ता) बताया.

पलटी: उन्होंने पहले कहा था कि यह 4 हफ्तों में खत्म हो जाएगा, लेकिन 3 मार्च को वह 'अनिश्चितकालीन समय' की बात करने लगे.

4 मार्च, 2026: 'ट्रंप बनाम नेतन्याहू' विवाद

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4 मार्च को यह बहस तेज हो गई कि आखिर इस युद्ध का असली 'मास्टरमाइंड' कौन है?

नेतन्याहू का बचाव: इजरायली पीएम ने फॉक्स न्यूज पर कहा कि हमला करना मजबूरी थी क्योंकि ईरान अंडरग्राउंड बंकर बना रहा था. उन्होंने इसे 'अब नहीं तो कभी नहीं' वाला कदम बताया.

ट्रंप का बयान: ट्रंप ने संकेत दिया कि वह नेतन्याहू से पीछे नहीं रहना चाहते. उन्होंने कहा, 'नेतन्याहू जो करना चाहते थे, हमने उससे कहीं ज्यादा किया है.'

मार्को रूबियो का खुलासा: इसी दौरान विदेश मंत्री मार्को रूबियो के एक बयान ने आग में घी डाल दिया. रूबियो ने कहा कि इजरायल अकेले हमला करने वाला था, इसलिए अमेरिका को मजबूरन इसमें शामिल होना पड़ा.

ट्रंप की सफाई: इस पर विवाद बढ़ने पर ट्रंप ने ट्वीट (पोस्ट) किया कि यह उनका अपना फैसला था क्योंकि 'ईरान उन्हें मारने की कोशिश कर रहा था.' यानी उन्होंने इसे इजरायल की मजबूरी के बजाय अपना 'पर्सनल बदला' बताया.

ये रणनीति है या कन्फ्यूज बयानबाजी?

ट्रंप का यह कहना कि 'ईरान के पास अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलें हैं', रक्षा विशेषज्ञों के दावों से अलग है. साथ ही, एक तरफ वो 'एंडलेस वॉर' (कभी न खत्म होने वाले युद्ध) के खिलाफ रहे हैं, लेकिन अब खुद कह रहे हैं कि वो 'हमेशा' लड़ सकते हैं.

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यह साफ झलकता है कि उनके बयान ठोस रणनीति के बजाय उस वक्त के माहौल और हेडलाइंस के हिसाब से बदल रहे हैं. युद्ध कहां जा रहा है, ये ट्रंप बिल्कुल नहीं जानते.

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