विधायकों ने दिखाए बागी तेवर! कर दी क्रॉस वोटिंग... ओडिशा राज्यसभा चुनाव में सियासी खेला

ओडिशा की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है. राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग के आरोप सामने आए हैं. बीजद के दो नेताओं ने स्वीकार किया है कि उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया है.

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ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग के आरोप सामने आए. (Representative Image/File) ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग के आरोप सामने आए. (Representative Image/File)

अजय कुमार नाथ

  • नई दिल्ली,
  • 16 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:12 PM IST

ओडिशा की राजनीति में सोमवार को उस समय बड़ा सियासी बवाल खड़ा हो गया जब राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग के आरोप सामने आए. इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब बीजू जनता दल के विधायक देवी रंजन त्रिपाठी ने खुलकर स्वीकार किया कि उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया है.

देवी रंजन त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने वरिष्ठ नेता दिलीप राय के पक्ष में वोट दिया. अपने फैसले को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा कि उनका मतदान बीजू पटनायक की विरासत और उनके आदर्शों को ध्यान में रखकर किया गया है.

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजद और कांग्रेस के बीच एक अनैतिक गठबंधन जैसी स्थिति बन रही है, जिससे वे सहमत नहीं थे.

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त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने अपना वोट पूरी तरह अपने विवेक के आधार पर दिया है. उनका मानना है कि हजारों बीजद समर्थकों और कार्यकर्ताओं की आवाज पार्टी नेतृत्व तक पहुंचनी चाहिए और उन्होंने उसी भावना से मतदान किया. उन्होंने यह भी कहा कि उनका वोट ओडिशा को भविष्य में मजबूत और समृद्ध बनाने के लिए दिल्ली में काम आएगा.

उन्होंने अपने पिता प्रभात त्रिपाठी का भी जिक्र किया, जो आपातकाल के समय प्रमुख पीड़ितों में शामिल थे. त्रिपाठी के अनुसार, छात्र जीवन और युवा राजनीति के समय से ही उन्होंने कांग्रेस विरोधी रणनीति अपनाई थी और बीजू पटनायक के आदर्शों से प्रेरित होकर राजनीति में आए थे.

उन्होंने कहा कि अगर पार्टी नेतृत्व हजारों कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनता, तो उन्हें चेताने और जगाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से मतदान करना जरूरी हो जाता है.

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देवी रंजन त्रिपाठी ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर उनके इस कदम के लिए उन्हें कोई सजा मिलती है, तो वे उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि बीजद उनका अपना दल है और उन्होंने इसे खड़ा करने में योगदान दिया है, इसलिए वे बीजू पटनायक की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए हर दंड सहने को तैयार हैं.

क्रॉस वोटिंग का एक और मामला

इस बीच, एक और बीजद नेता सौविक बिस्वाल ने भी क्रॉस वोटिंग करने की बात मानी है. बिस्वाल ने कहा कि उन्होंने उस उम्मीदवार को वोट दिया जिसे बीजू पटनायक का आशीर्वाद प्राप्त है.

उन्होंने पार्टी के अंदरूनी मामलों पर भी सवाल उठाए और पूछा कि जब उनके पिता को पहले पार्टी से निकाला गया था, तब उन्हें खुद क्यों नहीं हटाया गया.

सौविक बिस्वाल ने नवीन निवास से जुड़े एक पुराने विवाद का भी जिक्र किया और कहा कि जिस भरोसे के संकट की बात आज हो रही है, उसकी शुरुआत उनके पिता ने पहले ही उठा दी थी.

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता के साथ अन्याय हुआ था और उनका वोट उसी के खिलाफ एक विरोध का तरीका था.

बिस्वाल ने अपने बयान में कहा कि बीजू पटनायक एक राष्ट्रीय नायक थे और उन्होंने उसी व्यक्ति को वोट दिया है, जिसे उनके आदर्शों का आशीर्वाद प्राप्त है. उन्होंने भगवद्गीता का उदाहरण देते हुए कहा कि अन्याय करने वाला जितना दोषी होता है, उतना ही दोषी अन्याय सहने वाला भी होता है.

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कुल मिलाकर, क्रॉस वोटिंग को लेकर सामने आए इन बयानों ने ओडिशा की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व इस मामले में क्या कदम उठाता है और आगे राजनीतिक समीकरण किस तरह बदलते हैं.

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