MP: फूफा बने CM तो प्रोफेसर भतीजी के खंडहर बंगले की चमकी किस्मत, बिना इस्टीमेट शुरू हो गया काम 

पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय का एक बंगला अचानक सुर्खियों में आ गया है. दरअसल, यह बंगला प्रोफेसर प्रज्ञा यादव को अगस्त में आवंटित किया गया था. मगर, इसकी जर्जर हालत के चलते उन्होंने किराये पर कमरा लेकर रहना उचित समझा. मगर, अब उनके फूका मोहन यादव जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए हैं, तो उच्च शिक्षा अधिकारियों को अचानक इस बंगले की याद आ गई. 

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मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय का है यह जर्जर बंगला. मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय का है यह जर्जर बंगला.

रावेंद्र शुक्ला

  • शहडोल,
  • 21 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 4:37 PM IST

मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर प्रज्ञा यादव के जर्जर बंगले में शुरू हुआ मरम्मत कार्य सुर्खियों में है. वजह है कि इस जर्जर बंगले में जिसे रहना है, उनके फूफा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं. हालांकि, प्रोफेसर प्रज्ञा यादव को यह बंगला इसी साल अगस्त में आवंटित हुआ था. मगर, आवंटन के बाद जर्जर पड़े इस बंगले की विश्वविद्यालय प्रशासन को सुध नहीं थी. 

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बंगले की हालत इतनी खराब थी कि प्रोफेसर प्रज्ञा इसमें रहने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं और शहर के गंज इलाके में प्राइवेट कमरा लेकर किराए पर रहने लगीं. मगर, जैसे ही मध्यप्रदेश सरकार की कमान डॉक्टर मोहन यादव के हाथ आई, विश्वविद्यालय प्रशासन को शहीद पार्क के सामने इस बंगले की चिंता सताने लगी.  

उच्च शिक्षा विभाग ने तत्काल इस बंगले को चमकाने के निर्देश दे दिए. जल्दी इतनी दिखाई गई कि सुधार कार्य शुरू करने के पहले इस्टीमेट बनाने तक का इंतजार नहीं किया गया. आनन-फानन में इसकी मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया. इस मामले में जब हमने मरम्मत का जिम्मा संभाल रहे हाउसिंग बोर्ड के सहायक यंत्री से बात की, तो उनका कहना था कि उन्हें अपने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी मरम्मत करने के निर्देश मिले थे. 

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इसकी मरम्मत में कितना खर्च आएगा, उसका इस्टीमेट बनाने की प्रक्रिया चल रही है. हालांकि, इस बीच उन्होंने यह भी बताया कि आज ही उन्हें यह काम बंद करने के भी निर्देश मौखिक रूप से आ चुके हैं. पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय परिसर में तकरीबन 20 से ज्यादा बंगले हैं. 

करीब 40 साल पहले बने ज्यादातर इन बंगलों की हालत जर्जर हो चुकी है. मगर, इसके बावजूद भी अधिकांश बंगलों में प्रोफेसर्स और उनके परिवार के लोग रह रहे हैं. हालांकि, रहने के लिहाज से खतरनाक हो चुके इन भवनों की मरम्मत की सुध विश्वविद्यालय प्रशासन को नहीं है. लिहाजा, मुख्यमंत्री बनते ही प्रोफेसर की भतीजी के भवन की मरम्मत शुरू होने पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं. 

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