इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और लोगों के बीमार पड़ने के गंभीर मामले पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है. जस्टिस द्वारकाधीश बंसल और जस्टिस राजेंद्र कुमार वाणी की खंडपीठ ने साफ शब्दों में कहा कि यह एक बड़ी लापरवाही है और लोग पानी की वजह से मर रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है. हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए और दूषित पानी से बीमार हुए सभी लोगों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा दी जाए.
अदालत ने कहा, 'इंदौर एक बेहद सुंदर शहर है, पूरे देश में इसकी साफ-सफाई की तारीफ होती है. अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि इस सुंदरता और प्रतिष्ठा को बनाए रखा जाए.' सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि स्थानीय लोग अब भी साफ पानी से वंचित हैं. सैकड़ों परिवार पानी के लिए एक टैंकर पर निर्भर हैं. इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि सिर्फ एक टैंकर से क्या होगा? और तत्काल अतिरिक्त पानी के टैंकर भेजने के निर्देश दिए. कोर्ट ने कहा कि अगले 10 मिनट के भीतर अतिरिक्त टैंकर इलाके में पहुंचने चाहिए और उनके फोटो वकीलों के साथ साझा किए जाएं.
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अदालत ने यहां तक कहा कि कलेक्टर हों या एसडीएम, जिसे भी बुलाना पड़े, बुलाइए, लेकिन पानी के टैंकर हर हाल में पहुंचने चाहिए. इंदौर नगर निगम की ओर से हाई कोर्ट को बताया गया कि अब तक 30 पानी के टैंकर भेजे जा चुके हैं और 4 और टैंकर तुरंत भेजे जाएंगे. इसके साथ ही नगर निगम ने अदालत में स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल की. दरअसल, इस मामले में 31 दिसंबर को दो जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं. पहली याचिका हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश ईनाणी और दूसरी पूर्व पार्षद महेश गर्ग व कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें अधिवक्ता मनीष यादव ने पैरवी की.
हाई कोर्ट ने 31 दिसंबर की सुनवाई में नगर निगम को सभी प्रभावितों का मुफ्त इलाज कराने और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के अंतरिम निर्देश दिए थे. 2 जनवरी को इन आदेशों के पालन को लेकर स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई. साथ ही एक तीसरी जनहित याचिका पर भी सुनवाई हुई, जिस पर हाई कोर्ट ने इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को नोटिस जारी किए हैं. तीसरी याचिका पर अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी, जबकि पहली दो याचिकाओं पर 6 जनवरी को सुनवाई तय की गई है. सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मनीष यादव ने मृतकों के परिजनों को दी जाने वाली मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग की और कहा कि स्टेटस रिपोर्ट में केवल चार मौतों का जिक्र है, जबकि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है.
नलिनी शर्मा