MP: हाईवे पर मिली 2 साल की मासूम, हुई थी 'सौदे' की शिकार, पुलिस ने मानव तस्करी रैकेट का किया खुलासा

मध्य प्रदेश के श्योपुर में हाईवे पर मिली 2 साल की लावारिस बच्ची मामले में पुलिस ने नवजात तस्करी रैकेट का खुलासा किया है. जांच में सामने आया कि बच्ची को जन्म के बाद मां से अलग कर अलग-अलग लोगों को बेचा गया. इंदौर से राजगढ़ तक सौदा हुआ और बाद में बच्ची को सुनसान जगह छोड़ दिया गया. पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर डीएनए जांच शुरू की है.

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6 आरोपी गिरफ्तार.(Photo: Ravish Pal Singh/ITG) 6 आरोपी गिरफ्तार.(Photo: Ravish Pal Singh/ITG)

रवीश पाल सिंह

  • श्योपुर,
  • 03 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:36 PM IST

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां करीब दो साल की एक मासूम बच्ची सुनसान हाईवे पर लावारिस हालत में मिली. यह मामला 18 अप्रैल को उजागर हुआ, जब नेशनल हाईवे-552 पर सोईकलां के पास दांतरदा बैरियर के नजदीक बच्ची अकेली पाई गई. उसकी हालत और परिस्थितियों ने पुलिस को झकझोर दिया. शुरुआती जांच में ही पुलिस को संदेह हुआ कि बच्ची को जानबूझकर वहां छोड़कर फरार हुआ गया है, जिसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए हर एंगल से जांच शुरू की गई.

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घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, वाहनों की आवाजाही ट्रैक की गई और डिजिटल साक्ष्यों को इकट्ठा किया गया. जांच के दौरान जो सच सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया. पता चला कि बच्ची को साल 2024 में जन्म के कुछ ही दिनों बाद उसकी जैविक मां से अलग कर दिया गया था और संगठित नेटवर्क के जरिए अलग-अलग लोगों के हाथों बेचते हुए इंदौर तक पहुंचाया गया.

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इंदौर में ब्यूटी पार्लर संचालिका नीता जैन और उसके पति वैभव जैन ने बच्ची को राजगढ़ निवासी दंपती आकाश और कृतिका को करीब एक लाख रुपये में सौंप दिया. इसके बाद करीब दो साल तक बच्ची इसी दंपती के पास रही. लेकिन बाद में यही दंपती बच्ची को श्योपुर लाए और सुनसान जगह पर छोड़कर फरार हो गए.

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जांच में खुला सौदे का पूरा नेटवर्क

पुलिस ने तकनीकी जांच, बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रेल के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा. इस गहन जांच के बाद अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार आरोपियों में बच्ची को खरीदने वाला दंपती, सौदे के बिचौलिए और नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्य शामिल हैं.

पुलिस के अनुसार, यह पूरा मामला नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक संगठित रैकेट से जुड़ा है. जांच में सामने आया कि बच्ची को कई हाथों से गुजरते हुए आखिरकार श्योपुर तक लाया गया, जहां उसे छोड़ दिया गया. पुलिस इस नेटवर्क के अन्य संभावित कनेक्शन की भी जांच कर रही है.

इस मामले में एक महिला की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है, जिसने कथित तौर पर बच्ची को उसकी मां से अलग करवाया और शुरुआती सौदे की नींव रखी. फिलहाल वह फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है.

डीएनए टेस्ट और अस्पताल रिकॉर्ड खंगालने की तैयारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बच्ची की असली पहचान स्थापित करने के लिए डीएनए टेस्ट शुरू कर दिया है. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आखिर किन परिस्थितियों में जन्म के तुरंत बाद बच्ची को उसकी मां से अलग किया गया.

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इसके लिए नवंबर 2024 के आसपास के अस्पताल रिकॉर्ड, जन्म रजिस्टर और डिस्चार्ज एंट्री की जांच की जा रही है. निजी क्लीनिकों और अस्पतालों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई गई है.

पुलिस आरोपियों के बैंक खातों, ऑनलाइन लेनदेन, मोबाइल चैट और कॉल रिकॉर्ड का गहराई से विश्लेषण कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह रैकेट कब से सक्रिय था और कितने मासूम इस तरह के सौदों का शिकार बने.

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