स्वच्छता में नंबर-1 शहर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है. आयोग ने इसे नागरिकों के 'मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला' करार दिया है.
NHRC ने मीडिया रिपोर्ट्स का खुद संज्ञान लिया है कि दूषित पानी पीने से अब तक 10 लोगों की मौत हो गई और 40 से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए.
मेयर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार, शुरुआती जांच में पता चला है कि लीकेज के कारण नाले का पानी पीने के पानी की पाइपलाइन में घुस गया, जिससे भागीरथपुरा इलाके में डायरिया और उल्टी का प्रकोप फैल गया.
आयोग ने कहा कि यह पीड़ितों के मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर मामला है. इसलिए मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है.
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से बीमार पड़ने के बाद पिछले एक हफ्ते में छह महिलाओं सहित कम से कम दस से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना पर दुख जताया और मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की, साथ ही कहा कि सरकार सभी मरीजों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी.
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