मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने किसानों के हित में एक ऐसा फैसला लिया है जिसे राज्य के इतिहास में 'ऐतिहासिक' माना जा रहा है. सीएम की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई कैबिनेट की बैठक में किसानों और किसान संगठनों की मांग पर यह बड़ा फैसला लिया गया. इसके तहत अब राज्य में विकास परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण करने पर किसानों को उनकी जमीन की वैल्यू का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने भूमि अधिग्रहण कानून (2013 अधिनियम) के तहत मुआवजे के 'फैक्टर' को 1 से बढ़ाकर 2 करने का निर्णय लिया है. साल 2014-15 के नियमों के अनुसार, अब तक किसानों को उनकी जमीन की कीमत का दोगुना मुआवजा मिलता था. लेकिन अब फैक्टर-2 लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में यह राशि सीधे दोगुनी होकर कुल गाइडलाइन वैल्यू की चार गुना हो जाएगी. ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को जमीन अधिग्रहण पर चार गुना तक मुआवजा मिलेगा.
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अक्सर सरकारी गाइडलाइन रेट बाजार भाव से कम होते हैं, जिससे किसानों को अपनी पुश्तैनी जमीन देने में आर्थिक नुकसान महसूस होता था. इससे सिंचाई परियोजनाओं, सड़कों, रेल लाइनों और बांधों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के निर्माण में देरी होती थी. सरकार का मानना है कि चार गुना मुआवजा मिलने से किसान अब स्वेच्छा से विकास कार्यों के लिए जमीन देने को आगे आएंगे, जिससे परियोजनाओं की गति बढ़ेगी और किसानों के जीवन में समृद्धि आएगी.
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मध्य प्रदेश में प्रतिवर्ष सड़क, पुल, सिंचाई और एक्सप्रेसवे जैसे कार्यों के लिए लगभग ₹70,000 से ₹75,000 करोड़ का निवेश होता है. आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में लोक निर्माण विभाग ने लगभग ₹10,000 करोड़ का मुआवजा दिया है. नई व्यवस्था के तहत यह राशि अब करीब ₹20,000 करोड़ हो जाएगी, जो सीधे किसानों के खातों में जमा की जाएगी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि 'किसानों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और यह निर्णय विकास और किसान हितों के बीच संतुलन स्थापित करेगा.'
रवीश पाल सिंह