कोलकाता के एक सरकारी डेंटल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने वह कर दिखाया जो देश-विदेश के कई बड़े अस्पताल नहीं कर पाए. लगभग 912 दिनों तक खुले मुंह के साथ रहने को मजबूर एक नाबालिग लड़की अब आखिरकार अपना मुंह बंद कर पा रही है.
दरअसल, लगभग 10 साल की बच्ची एक ऐसी बीमारी से पीड़ित थी जिसने उसके जबड़े और चेहरे की मांसपेशियों को कंट्रोल करने वाली नसों को नुकसान पहुंचाया था, जिससे वह लगभग 912 दिनों तक अपना मुंह बंद नहीं कर पा रही थी.
राज्य के अंदर और बाहर कई अस्पतालों में इलाज के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ. अब, आर अहमद डेंटल कॉलेज और हॉस्पिटल में इलाज के बाद बच्ची आखिरकार अपना मुंह बंद कर पा रही है.
हॉस्पिटल के एक सीनियर डॉक्टर ने एक न्यूज को बताया, "वह एक्यूट डिसेमिनेटेड एन्सेफेलोमाइलाइटिस (ADEM) से पीड़ित थी, जो एक दुर्लभ ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जिसमें इम्यून सिस्टम दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड पर हमला करता है."
डॉक्टर ने कहा कि लंबे समय तक मुंह बंद न कर पाने के कारण कई दिक्कतें हुईं, जिसमें मुंह का सूखना, जबड़े का संतुलन बिगड़ना और दांतों का असामान्य रूप से ऊपर की ओर बढ़ना शामिल है, जिसे सुप्रा-इरप्शन कहा जाता है.
उन्होंने आगे कहा, "क्योंकि उसका मुंह इतने लंबे समय तक खुला रहा, इसलिए दांत अपनी सामान्य स्थिति से काफी हट गए थे, जिससे इन्फेक्शन और स्थायी नुकसान का खतरा बढ़ गया था."
इलाज की योजना बनाने के लिए हॉस्पिटल में एक विशेष मेडिकल बोर्ड बनाया गया था. विस्तृत जांच के बाद डॉक्टरों ने निष्कर्ष निकाला कि मुंह बंद करना मेडिकल रूप से बहुत जरूरी हो गया था.
इलाज में शामिल एक अन्य डॉक्टर ने कहा, "इस मामले में जबड़े को बंद करने और आगे की दिक्कतों को रोकने के लिए पीछे के दांतों को निकालना ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प था." हाल ही में की गई प्रक्रिया के बाद लड़की अब अपना मुंह बंद कर सकती है.
डॉक्टर ने आगे कहा, "यह इलाज भविष्य में दांतों के खराब होने और मुंह के इन्फेक्शन के खतरे को काफी कम कर देगा. ADEM का इलाज भी साथ-साथ चल रहा है."
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