मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है. BJP के सीनियर लीडर पहले भी अपने आपत्तिजनक बयानों के कारण कई बार मुश्किलों में पड़ चुके हैं और फिलहाल इंदौर में पानी के संकट पर अपनी भद्दी टिप्पणियों के कारण आलोचना झेल रहे हैं. बीजेपी नेता ने तब राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया जब उन्होंने कैमरे पर एक आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया. यह घटना तब हुई जब एक टीवी पत्रकार ने उनसे इंदौर में दूषित पानी के जानलेवा संकट के बारे में तीखे सवाल पूछे.
MP के हरी विकास, आवास और संसदीय मामलों जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभालने वाले विजयवर्गीय ने एक टीवी रिपोर्टर पर गुस्सा उतारा. रिपोर्टर ने उनसे भागीरथपुरा इलाके में पानी के दूषण के कारण उल्टी और दस्त फैलने के बारे में सवाल किया था.
यह इलाका उनके इंदौर-1 विधानसभा क्षेत्र में आता है. बुधवार रात को 69 वर्षीय राजनेता ने मीडिया से बातचीत करते हुए शुरू में शांतिपूर्वक सवालों के जवाब दिए. हालांकि, जब टीवी रिपोर्टर ने विजयवर्गीय से पूछा कि निवासियों को निजी अस्पतालों में दिए गए बिलों का भुगतान क्यों नहीं किया गया और इलाके में साफ पानी की व्यवस्था अपर्याप्त क्यों है, तो उनका गुस्सा भड़क उठा.
पत्रकार को 'अभद्र' जवाब
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने रिपोर्टर पर गुस्सा करते हुए कहा, "बेकार (फालतू) सवाल मत पूछो."हालांकि, रिपोर्टर जवाब के लिए दबाव बनाता रहा, जिससे तीखी बहस हुई. इस दौरान वरिष्ठ बीजेपी नेता ने एक अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया ताकि रिपोर्टर के सवाल को खारिज कर सकें.
पत्रकार को वरिष्ठ कैबिनेट सदस्य से अपनी भाषा पर ध्यान देने की सलाह देते हुए भी सुना जा सकता है. वीडियो वायरल होने पर विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर अपने आचरण पर खेद व्यक्त किया.
इन भद्दी टिप्पणियों पर निशाना साधते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी मंत्री के इस्तीफे की मांग की और उन पर अहंकार तथा असंवेदनशीलता का आरोप लगाया.
'कटी-फटी' आजादी
यह अनुभवी राजनेता द्वारा की गई विवादास्पद टिप्पणियों की कड़ी में नई घटना है. अगस्त 2025 में विजयवर्गीय ने दावा किया कि 15 अगस्त 1947 को भारत को जो स्वतंत्रता मिली थी, वह एक 'कटी-फटी' यानी अधूरी स्वतंत्रता थी.
इंदौर में अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान कैलाश ने 'अखंड भारत' की परिकल्पना व्यक्त की और जोर देकर कहा कि एक दिन ऐसा आएगा जब इस्लामाबाद में भारतीय तिरंगा फहराया जाएगा. यह विजन सचमुच एक एकजुट और संपूर्ण भारत के सपने को पूरा करेगा.
कांग्रेस ने विजयवर्गीय पर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान करने का आरोप लगाया, जबकि बीजेपी ने मंत्री का बचाव करते हुए कहा कि वे पिछली सरकार की आलोचना कर रहे थे.
ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटरों को 'सबक'
अक्टूबर 2025 में विजयवर्गीय को इंदौर में दो ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटरों के साथ कथित छेड़छाड़ की घटना पर अपनी टिप्पणियों के लिए व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को अपने होटल से निकलने से पहले अधिकारियों को सूचित करना चाहिए था और इस घटना को अधिकारियों तथा क्रिकेटरों दोनों के लिए एक 'सबक' बताया.
इस बात पर जोर देते हुए कि क्रिकेटर भारत में बहुत लोकप्रिय हैं, विजयवर्गीय ने कहा कि खिलाड़ियों को सार्वजनिक रूप से बाहर जाने से पहले अपनी सुरक्षा या स्थानीय प्रशासन को सूचित करना चाहिए.
छोटे कपड़ों पर 'शूर्पणखा' कमेंट
अप्रैल 2023 में विजयवर्गीय ने इंदौर में एक धार्मिक कार्यक्रम में यह कहने के बाद हंगामा खड़ा कर दिया कि 'खराब या छोटे कपड़े' पहनने वाली लड़कियां 'शूर्पणखा' (रामायण में राक्षस राजा रावण की बहन) जैसी दिखती हैं.
विदेशी बनाम भारतीय सुंदरता
जून 2025 में कैबिनेट मंत्री ने कहा कि वे महिलाओं के 'छोटे कपड़े' पहनने के चलन को नापसंद करते हैं. उन्होंने जोर दिया कि यह सुंदरता की एक विदेशी अवधारणा है और भारतीय परंपरा के अनुरूप नहीं है.
विजयवर्गीय ने कहा, ''भारतीय संस्कृति का हवाला देते हुए बीजेपी नेता ने कहा कि वे महिलाओं को 'देवी का रूप' मानते हैं."अगर यहां (भारत में) कोई लड़की अच्छे और सुंदर कपड़े पहनती है, अच्छा मेकअप करती है और अच्छे गहने पहनती है, तो लोग उसे बहुत सुंदर मानते हैं. लेकिन विदेश में अगर कोई (महिला) कम कपड़े पहनती है, तो इसे अच्छा माना जाता है. अब यह उनकी (विदेशियों की) सोच है."
कई मौकों पर आलोचना का जवाब देते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि उन्होंने संस्कृति और मूल्यों पर केवल अपने व्यक्तिगत विचार व्यक्त किए थे और उनका महिलाओं या खिलाड़ियों का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था.
विपक्षी कांग्रेस ने विजयवर्गीय के बयानों को लेकर बार-बार उन्हें निशाना बनाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी टिप्पणियां एक मंत्री के लिए अशोभनीय हैं, जबकि बीजेपी ने कहा है कि उनकी टिप्पणियों को अक्सर गलत समझा जाता है और संदर्भ से बाहर लिया जाता है. (इनपुट: न्यूज एजेंसी)
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