मध्य प्रदेश के जबलपुर में नाव डूबने से हुए हादसे में नौ लोगों की जान चली गई. शुक्रवार को बचाव दल ने एक मां और उसके चार साल के बेटे के शव बरामद किए, जो एक-दूसरे को आखिरी बार गले लगाए हुए थे. क्रूज़ बोट के पलटने से कुछ ही पल पहले रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो सामने आया है. वीडियो में देखा जा सकता है कि पर्यटक ठंडे मौसम और तेज़ हवाओं का मज़ा लेते हुए दिख रहे हैं. बोट पर मौजूद लोगों को आस-पास मंडरा रहे खतरे का ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था.
विज़ुअल्स अब सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहे हैं. उनमें यात्री पानी के ऊपर से गुज़रती तेज़ हवाओं के बीच सुहाने मौसम का लुत्फ़ उठाते हुए नज़र आ रहे हैं. इस फ़ुटेज में हवा की तेज़ी साफ़ तौर पर देखी जा सकती है.
हालांकि, कुछ ही मिनटों के अंदर मौसम अचानक बिगड़ता और नाव पलट जाती है, जिससे उसमें सवार नौ यात्रियों की मौत हो गई. फ़ुटेज से यह भी पता चलता है कि उस वक्त किसी भी यात्री ने लाइफ़ जैकेट नहीं पहनी हुई थी. कुछ लोग बाद में लाइफ जैकेट पहने, जिससे कई लोगों को बचाने में मदद मिली. अधिकारियों का अनुमान है कि सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल की वजह से करीब 25 लोग बच पाए.
क्रूज़ पलटने से ठीक पहले का एक वीडियो भी सामने आया है. वीडियो में दाहिनी तरफ मां और उनका बेटा दिखाई दे रहे हैं. हादसे से ठीक पहले बेटा अपनी मां की गोद में था.
क्या है पूरा मामला?
जबलपुर में हुआ हादसा गुरुवार शाम को नर्मदा नदी पर बने बरगी बांध पर हुआ, जहां अचानक आए तूफ़ान ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया. उफनते पानी और तेज़ हवाओं में फंसी नाव अपना संतुलन खो बैठी और पलट गई. शुक्रवार को डूबी नाव से पांच और शव बरामद होने के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई. करीब छह लोग अभी भी लापता हैं. अब तक 28 यात्रियों को बचाया जा चुका है.
रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी है, जिसमें सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें जलाशय में तलाशी अभियान चला रही हैं. कम विज़िबिलिटी की वजह से बचाव कार्यों में लगातार बाधा आ रही है. अधिकारियों को आशंका है कि नाव के मलबे के अंदर अभी भी कुछ और शव फंसे हो सकते हैं.
आगरा से बुलाए गए गोताखोर
30 अप्रैल को तेज़ हवाओं की वजह से खमरिया द्वीप के पास बरगी बांध में एक टूरिस्ट क्रूज़ नाव पलटने के बाद डूब गई. ज़िला प्रशासन की गुजारिश पर भारतीय सेना की गोताखोर टीमों को रात भर में आगरा से बुलाया गया और उन्होंने घटनास्थल पर बचाव अभियान में हिस्सा लिया. सेना के गोताखोरों ने अब तक पांच शव बरामद किए हैं और वे जारी तलाशी अभियान में सहायता कर रहे हैं. बचाव अभियान जारी है.
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प्रशासन और चश्मदीदों ने क्या कहा?
डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल अतुल सिंह ने बताया कि डूबी हुई नाव को तभी बाहर निकाला जाएगा, जब यह पूरी तरह से सुनिश्चित हो जाएगा कि उसके अंदर अब कोई भी शख्स नहीं बचा है. उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय निर्माण कार्य में लगे मज़दूर सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे थे और उन्होंने जीवित बचे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई.
चश्मदीदों के मुताबिक, मौसम बहुत तेज़ी से खराब हो गया था और तेज़ हवाओं की वजह से नदी का पानी उफनने लगा था. बताया जा रहा है कि कई यात्रियों ने खतरे का संकेत देते हुए नाव के कर्मचारियों से वापस लौटने की गुहार लगाई थी, लेकिन उनकी चेतावनियों को अनसुना कर दिया गया और नाव पलटकर डूबने से पहले ही बहती चली गई. बाद में, कुछ स्थानीय लोगों ने रस्सियों की मदद से उन यात्रियों को बचाने में मदद की, जिन्होंने लाइफ जैकेट पहन रखी थी.
मध्य प्रदेश के पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि गुरुवार को चार शव बरामद किए गए थे, जबकि शुक्रवार की सुबह चलाए गए बचाव अभियान के दौरान पांच और शव मिले. उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं, जिसमें लाइफ जैकेट के इस्तेमाल में कथित तौर पर बरती गई लापरवाही की जांच भी शामिल है.
इस घटना के बाद, राज्य सरकार ने इसी तरह की अन्य क्रूज़ नावों के ऑपरेशन पर रोक लगा दी है और इस दुखद हादसे की जांच शुरू कर दी है. इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर गहरा शोक जताया है. उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है.
रवीश पाल सिंह