पहले हरभजन सिंह को फंसाया, अब इंदौर के कारोबारी से करोड़ों मांगे... हनी ट्रैप वाली श्वेता जैन गिरफ्तार

इंदौर में हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग के बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है. पुलिस ने दो महिलाओं समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरोह अश्लील फोटो-वीडियो के जरिए कारोबारियों को फंसाकर करोड़ों रुपये की उगाही करता था. मुख्य आरोपी श्वेता जैन और अलका दीक्षित बताई गई हैं. जांच में एक पुलिसकर्मी की संदिग्ध भूमिका भी सामने आई है. पुलिस ने मोबाइल, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल सबूत जब्त किए हैं. अधिकारियों को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार ड्रग्स तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों से भी जुड़े हो सकते हैं.

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पुलिस को मोबाइल फोन और चैट रिकॉर्ड मिला है. Photo ITG पुलिस को मोबाइल फोन और चैट रिकॉर्ड मिला है. Photo ITG

धर्मेंद्र कुमार शर्मा

  • इंदौर,
  • 19 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:04 PM IST

इंदौर नगर निगम के सिटी इंजीनियर रहे हरभजन सिंह को वर्ष 2018 में हानि ट्रैप करने के मामले में आरोपी रही श्वेता जैन फिर इंदौर के एक कारोबारी के साथ करोड़ों की ब्लैकमेलिंग और पुलिस कर्मियों के गठजोड़ से ठगने के मामले में पकड़ी गई है, जिसे पुलिस ने भोपाल के मिनाल रेसीडेंसी से पकड़ा है महिला के साथी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है. यह गिरोह कथित तौर पर अश्लील फोटो और वीडियो के जरिए कारोबारियों को फंसाकर करोड़ों रुपये की वसूली करता था.

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पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन भोपाल निवासी श्वेता जैन और इंदौर की अलका दीक्षित द्वारा किया जा रहा था. इनके साथ अलका का बेटा और उसका सहयोगी लाखन पटेल भी इस गिरोह में शामिल थे. इसके अलावा इंदौर में पदस्थ पुलिसकर्मी विनोद शर्मा को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.

अश्लील फोटो और वीडियो वायरल
मामले का खुलासा तब हुआ जब इंदौर के एक शराब कारोबारी जितेंद्र ठाकुर ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने बताया कि कुछ लोग उनके अश्लील फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लगातार एक करोड़ रुपये की मांग कर रहे थे. जब कारोबारी ने पैसे देने से इनकार किया तो आरोपियों ने उन्हें बदनाम करने और सोशल मीडिया पर वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी.

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प्राइवेट वीडियो रिकॉर्ड की जाती थी
शिकायत मिलने के बाद क्राइम ब्रांच ने तुरंत जांच शुरू की. जांच में पता चला कि यह पूरा गिरोह सुनियोजित तरीके से लोगों को हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग के जाल में फंसाता था. पहले कारोबारी से संपर्क कर विश्वास बनाया जाता था, फिर निजी बातचीत और वीडियो कॉल रिकॉर्ड कर लिए जाते थे. बाद में इन्हीं रिकॉर्डिंग्स को हथियार बनाकर भारी रकम की मांग की जाती थी.

पुलिस के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि अलका दीक्षित इस पूरे गिरोह की मुख्य ऑपरेटर की भूमिका निभा रही थी, जबकि अन्य सदस्य उसके निर्देशों पर काम करते थे. आरोपियों ने कारोबारी पर दबाव बनाने के लिए सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से सामग्री वायरल करने की धमकी भी दी थी.

मुख्य आरोपी गिरफ्तार
क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई करते हुए सभी मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं पुलिसकर्मी विनोद शर्मा की भूमिका संदिग्ध मिलने पर उसे भी हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है. पुलिस को शक है कि इस गिरोह को कुछ अन्य लोगों का भी संरक्षण मिल सकता है, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है.

मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड मिले
जांच के दौरान पुलिस ने कई मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल सबूत भी जब्त किए हैं. इनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह ने और किन-किन लोगों को अपना शिकार बनाया है.

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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक मामला नहीं बल्कि एक बड़े संगठित आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसमें ड्रग्स और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर अपराधों के तार भी जुड़े होने की आशंका है. फिलहाल सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जा रहा है और आगे की जांच जारी है.

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