'पैसे बचाने के चक्कर में ड्रेनेज के पास बिछाई गई वॉटर लाइन', 'वॉटरमैन ऑफ इंडिया' बोले- इंदौर त्रासदी भ्रष्टाचार का सीधा नतीजा

Indore water contamination: 'वॉटरमैन ऑफ इंडिया' ने दावा किया कि इंदौर नगर निगम के ठेकेदार पैसे बचाने के लिए पीने के पानी की पाइपलाइन और गंदे पानी की निकासी को एक-दूसरे के बेहद करीब बिछाते हैं. यह एक 'सिस्टम-जनित आपदा' है.

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भ्रष्टाचार ने पिलाया इंदौर को गंदा पानी.(PHOTO:PTI) भ्रष्टाचार ने पिलाया इंदौर को गंदा पानी.(PHOTO:PTI)

aajtak.in

  • इंदौर ,
  • 05 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:11 AM IST

जाने-माने जल संरक्षणवादी राजेंद्र सिंह ने दूषित पीने के पानी से हुई मौतों को सिस्टम की बनाई हुई आपदा बताया, और आरोप लगाया कि इस त्रासदी के लिए गहरे तक फैला भ्रष्टाचार जिम्मेदार है. मैगसेसे अवॉर्ड विजेता ने चिंता जताई कि इंदौर जैसे शहर में ऐसा संकट कैसे हो सकता है, जिसे लगातार भारत का सबसे साफ शहर माना जाता है.

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'वॉटरमैन ऑफ इंडिया' कहे जाने वाले राजेंद्र सिंह ने एक न्यूज एजेंसी को बताया, "अगर देश के सबसे साफ शहर में ऐसी त्रासदी हो सकती है, तो इससे पता चलता है कि दूसरे शहरों में पीने के पानी की सप्लाई सिस्टम की हालत कितनी गंभीर होगी."

सरकारी अधिकारियों ने माना कि टॉयलेट से सीवेज का पानी ओवरफ्लो होकर पानी की मेन पाइपलाइन में मिल गया, जिससे उल्टी और दस्त के गंभीर मामले सामने आए.

राजेंद्र सिंह ने दावा किया, "इंदौर में दूषित पीने के पानी का संकट सिस्टम की बनाई हुई आपदा है. पैसे बचाने के लिए ठेकेदार पीने के पानी की पाइपलाइन को ड्रेनेज लाइन के बहुत पास बिछाते हैं."

उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार ने पूरे सिस्टम को बर्बाद कर दिया है. उन्होंने कहा कि इंदौर की घटना इसी भ्रष्ट सिस्टम का सीधा नतीजा है.

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सिंह ने कहा, "इंदौर में हर साल गिरता भूजल स्तर सबसे ज्यादा चिंता की बात है. मैं 1992 में पहली बार इंदौर गया था. तब भी मैंने पूछा था कि यह शहर नर्मदा नदी के पानी पर कब तक निर्भर रहेगा?" इंदौर का भूजल स्तर साल-दर-साल खतरनाक ढंग से गिर रहा है, जिसे उन्होंने सबसे बड़ी चुनौती बताया.

'वॉटरमैन' राजेंद्र सिंह का इंदौर त्रासदी पर बड़ा प्रहार.(Photo:PTI)

ताजा अपडेट के मुताबिक, इंदौर में दूषित पीने के पानी से फैले डायरिया के प्रकोप के बीच फिलहाल 142 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 11 ICU में हैं. वहीं, संक्रमण के केंद्र भागीरथपुरा इलाके में 9 हजार से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग के दौरान 20 नए मरीज पाए गए.

भागीरथपुरा में चल रहे सर्वे के दौरान स्वास्थ्य टीमों ने 2354 घरों के 9416 लोगों की जांच की, जहां दूषित पानी से आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार छह लोगों की मौत हो गई है और 20 नए मामले सामने आए हैं. प्रकोप के बाद अब तक 398 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया था. इनमें से 256 मरीज ठीक होने के बाद डिस्चार्ज हो चुके हैं. फिलहाल 142 मरीज अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं, जिनमें से 11 ICU में भर्ती हैं.

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