मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भगीरथपुरा इलाके में उल्टी और दस्त की गंभीर बीमारी फैलने के पीछे दूषित पीने का पानी जिम्मेदार पाया गया है. एक लैब रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि होने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है.
इंदौर के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि भगीरथपुरा से लिए गए पानी के सैंपल की जांच में पाइपलाइन में लीकेज पाया गया. पाइपलाइन के पास बने एक शौचालय के नीचे से लीकेज के कारण पानी गंदा हो गया था, जिससे संक्रमण फैलने लगा. इस दूषित पानी के सेवन से लोगों में उल्टी, दस्त और पेट से जुड़ी अन्य समस्याएं देखने को मिलीं.
अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने कहा कि पूरे जल आपूर्ति नेटवर्क की विस्तार से जांच की जा रही है ताकि कहीं और लीकेज न हो. फिलहाल इलाके में साफ पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई है, लेकिन लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी जा रही है.
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, भगीरथपुरा के 1714 घरों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें 8571 लोगों की जांच हुई. इसमें से 338 लोगों में हल्के लक्षण पाए गए और उन्हें घर पर प्राथमिक उपचार दिया गया. पिछले आठ दिनों में 272 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें से 201 अभी भी अस्पताल में हैं, 32 मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है और वे आईसीयू में भर्ती हैं.
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इस गंभीर घटना से सबक लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार पूरे राज्य के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्वास्थ्य आपदाओं से बचा जा सके और समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सकें. प्रशासन जनता से साफ-सफाई और स्वच्छ पानी पीने के प्रति जागरूक रहने की अपील कर रहा है.
बता दें कि इंदौर में दूषित पानी पीने की वजह से हुए मौतों के आंकड़ों को लेकर काफी कन्फ्यूजन है. प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चार लोगों की मौत की बात कही है. वहीं शहर के मेयर का कहना है कि 7 लोगों की मौत हुई. स्थानीय लोगों का दावा इनसे बिल्कुल अलग है. उनका दावा है कि 13 लोगों की जान गई है.
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