Ex PM राजीव गांधी का चश्मा... 34 साल से एक शख्स ने रखा सहेजकर, दिग्गज नेता करोड़ों रुपए का दे चुके लालच

उपहार अक्सर यादों से जुड़ा होता है, जो किसी खास अनमोल पल को याद दिलाता है. वह हमेशा-हमेशा के लिए कीमती हो जाता है और अगर यही कीमती उपहार किसी ख़ास का हो तो फिर क्या ही कहना. ऐसा ही एक ख़ास उपहार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपनी पार्टी के एक छोटे से कार्यकर्ता को दिया था. जिसे इस कार्यकर्ता ने 35 साल से सहेज कर रखा है.

Advertisement
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का चश्मा. (PHOTO:ITG) पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का चश्मा. (PHOTO:ITG)

विजय कुमार विश्वकर्मा

  • रीवा ,
  • 21 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 12:58 PM IST

मध्य प्रदेश के रीवा के आशीष शर्मा को बड़े प्यार से राजीव गांधी ने आंखों को सुकून देने वाला चश्मा गिफ्ट किया था. जिसकी कीमत लाखों में थी. गिफ्ट देने के कुछ दिन बाद ही राजीव गांधी इस दुनिया को अलविदा कह गए. 

यह वाकया 34 साल पुराना है. चुनावी सभा के सिलसिले में पूर्व पीएम राजीव गांधी का रीवा दौरा था. 8 मई 1991 को SAF ग्राउंड में राजीव गांधी चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे, उसी दौरान 20 साल के कांग्रेस कार्यकर्ता आशीष शर्मा से उनकी मुलाकात हुई. 

Advertisement

खुली जीप में सवार राजीव गांधी को अपने बीच पाकर आशीष शर्मा की खुशी का ठिकाना न रहा. युवा कार्यकर्ता आशीष शर्मा ने राजीव गांधी को माल्यार्पण करते हुए उनका अभिवादन किया. उसी दौरान कार्यकर्ता की नजर राजीव गांधी के विदेशी विंटेज चश्मे पर टिक गई. 

आशीष से रहा न गया, उन्होंने हिम्मत जुटाकर निशानी के तौर पर राजीव गांधी से उनका कीमती चश्मा मांग लिया. भीषण गर्मी और तेज धूप के बावजूद राजीव गांधी ने बड़ी सहजता से अपनी आंखों से चश्मा निकालकर युवा कार्यकर्ता को गिफ्ट कर दिया. 

उस दौरान कुछ लोगों ने एतराज जताने की कोशिश की. राजीव गांधी से कहा कि चश्मा निकलने से आपकी आंखों को तकलीफ हो सकती है, इस बात की परवाह किए बगैर राजीव गांधी ने युवा कार्यकर्ता का दिल रखने के लिए चश्मा गिफ्ट कर दिया.

Advertisement

पूर्व पीएम से अनमोल उपहार मिलते ही आशीष शर्मा खुशी से झूम गए. कार्यकर्ता राजीव गांधी जिंदाबाद के नारे लगाते हुए उन्होंने अपने घर की ओर दौड़ लगा दी.

आशीष शर्मा ने बताया, ''पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हेलीपैड से सभा स्थल जाने के लिए एक खुली जीप में सवार हुए थे. एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री कुंवर अर्जुन सिंह उनके साथ थे. मैंने राजीव गांधी का अभिवादन करते हुए माल्यार्पण किया. इसी दौरान मैंने निशानी के तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री से उनका चश्मा मांग लिया. तब से उन्होंने इस चश्मे को धरोहर माना लिया और सहेज कर रख दिया. राजीव गांधी से निशानी के तौर मिले चश्मे पर कई दिग्गज राजनेताओं की नजर थी. मुझे बड़े ऑफर भी दिए गए. लाख-करोड़ों रुपए की कीमत लगाई गई, पर मैंने देने से इनकार कर दिया.''

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »