MP में 'वंदे मातरम्' पर संग्राम: कांग्रेस MLA आरिफ मसूद ने उठाए सवाल, BJP सरकार के मंत्री बोले- दिक्कत है तो पाकिस्तान चले जाएं

वंदे मातरम् को लेकर मध्यप्रदेश का सियासी पारा एक बार फिर से गरम हो गया है और इसकी अनिवार्यता को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है.

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आरिफ मसूद पहले भी वंदे मातरम गाने से कर चुके हैं मना.(Photo:ITG) आरिफ मसूद पहले भी वंदे मातरम गाने से कर चुके हैं मना.(Photo:ITG)

रवीश पाल सिंह

  • भोपाल ,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:50 PM IST

मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर बड़ा सियासी और वैचारिक विवाद खड़ा हो गया है. केंद्र सरकार के ऐलान के बाद प्रदेश में अब सभी शिक्षण संस्थानों, मदरसों और सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सभी 6 छंदों का गायन अनिवार्य किया जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे तुरंत लागू करने के निर्देश देते हुए इसे आजादी के सेनानियों को सच्ची श्रद्धांजलि बताया तो वहीं कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इसपर आपत्ति जताई है. आरिफ मसूद ने इसे मजहबी आजादी के खिलाफ बताया है तो बीजेपी ने उन्हें पाकिस्तान जाने की सलाह दे दी है.
 
दरअसल, मध्यप्रदेश में अब हर सरकारी कार्यक्रम, हर स्कूल और यहां तक कि मदरसों में भी राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सभी छह छंद गूंजेंगे. घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे तत्काल लागू करने के निर्देश दिए और कहा कि यही अमर शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. सरकार का तर्क है कि आजादी की लड़ाई में जिस मंत्र ने ऊर्जा भरी, वह अब नई पीढ़ी को राष्ट्रभाव से जोड़ेगा.
 
लेकिन इस फैसले ने सियासी तापमान भी बढ़ा दिया है. कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इसे मजहबी आजादी से जोड़ते हुए अनुच्छेद 25 का हवाला दिया है तो वहीं कुछ मुस्लिम संगठनों और मौलानाओं ने भी पूरे छह छंद अनिवार्य किए जाने पर आपत्ति जताई है.

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मुख्यमंत्री मोहन यादव के ऐलान का कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने विरोध किया और कहा कि भारत एक प्रजातांत्रिक देश है. हमें संविधान के आर्टिकल 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार मिला हुआ है. कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि विवाद केवल वंदे मातरम् की कुछ लाइनों को लेकर है, जो हमारी मजहबी आजादी पर अंकुश लगाती हैं.
 
काजी रफीक अहमद का कहना है कि वंदे मातरम की अनिवार्यता मदरसों में भी की जानी है. लेकिन भोपाल के मदरसों में फिलहाल इसे लेकर शंका बनी हुई है और उनका कहना है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस नए कानून की स्टडी कर रहा है. जब तक बोर्ड अपनी राय नहीं बना लेता, तब तक हम कोई निर्णय नहीं लेंगे.

वहीं, मुस्लिम स्कॉलर्स मोहम्मद अख्तर काजमी ने सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि सरकार अपना असली काम छोड़ मजहबी मुद्दों को क्यों उठाती रहती है?

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क्या है वंदे मातरम् के 6 छंदों का विवाद ?
अभी तक वंदे मातरम् का केवल पहला हिस्सा ही गाया जाता था. लेकिन अब केंद्र सरकार ने पूरे 6 छंदों को अनिवार्य किया है. मुस्लिम समुदाय का तर्क है कि बाद के छंदों में मातृभूमि की वंदना जिस स्वरूप में की गई है वो उनके मजहबी सिद्धांतों के खिलाफ है
 
बीजेपी ने वंदे मातरम पर कांग्रेस विधायक और मुस्लिम स्कॉलर्स की आपत्ति पर कड़ा ऐतराज जताया है. बीजेपी नेता और मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने वंदे मातरम न गाने वालों को पाकिस्तान जाने की सलाह दी है.

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