मध्य प्रदेश की राजधानी के सबसे बड़े जेपी अस्पताल में मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. सरकारी सप्लाई की दवाइयों में लगातार निकल रही गंदगी ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है.
जिला अस्पताल में एक मरीज गले में दर्द और खांसी की शिकायत लेकर जेपी अस्पताल पहुंचा था. डॉक्टर ने जांच के बाद उसे पर्ची पर माउथवॉश (गार्गल) लिखकर दे दिया. मरीज अस्पताल के मेडिकल काउंटर पर पर्ची देकर दवाइयां लेता है, लेकिन माउथवॉश की शीशी के अंदर बिलबिलाता कीड़ा दिख जाता है.
जेपी अस्पताल में इससे पहले एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया था, जिसमें फफूंद लगी दवाइयां संतोष सेन नामक मरीज को दी गईं. यह जिला अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर रहा था. लेकिन वह मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि एक और नया मामला सामने आ गया, जो अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को खुलकर दिखाता है.
इसके बावजूद भी जिला अस्पताल प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है. अब सवाल यह है कि जब टैबलेट में फफूंद लगी दवाइयां दी गईं, तब भी प्रशासन हरकत में नहीं आया. अब माउथवॉश में कीड़ा मिलने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही.
मामला गरमाने के बाद स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी बचाव की मुद्रा में नजर आए. CMHO मनीष शर्मा ने कहा कि मामले को संज्ञान में लेकर तुरंत कमेटी बना दी गई है. यह कमेटी हॉस्पिटल में दवाइयों के रखरखाव और गुणवत्ता की निगरानी करेगी. सीएमएचओ ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.
धर्मेंद्र साहू