भारत में साहित्य के सबसे बड़े आयोजन, साहित्य आजतक में इसबार साहित्य के साथ-साथ साहित्य और कला की विविध विधाओं को भी जगह दी गई है ताकि साहित्य पर बात करने के क्रम में एक तरह की समग्रता देखने को मिले.
इसी मकसद से रंगमंच, नुक्कड़ नाटक और संगीत की विविध शैलियों के साथ साहित्य के इस महापर्व को सजाने का काम किया गया है. और जब बात रंगमंच की हो तो कुछ कालजयी नाटकों को याद करना, उन्हें फिर से दोहराया जाना तो बनता ही है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए साहित्य आजतक के मंच पर पहले चर्चित नाटक 'गालिब इन देल्ही' का मंचन किया गया.
यह अब तक सबसे लंबे समय तक चलने वाले नाटकों में से एक है और 1997 से इसका मंचन जारी है. साहित्य आजतक के दर्शकों और श्रोताओं ने भी इस नाटक की प्रस्तुति देखी.
गालिब इन डेल्ही
मिर्जा ग़ालिब को कौन नहीं जानता. गालिब किसी एक रंग, एक एहसास से बंधे शख्स नहीं, उनकी शायरी इंसानियत की खुशबू से सराबोर है...पर क्या होता गर गालिब इन दिनों दिल्ली आ जाते.
'होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे’, मिर्ज़ा ग़ालिब ने ये शेर चाहे जिस वजह से कहा हो पर नाटक 'गालिब इन देल्ही' उनके ऐसे ही शेर को जिंदा करता है.
1857 के गदर के साक्षी रहे गालिब के लिए आज 21 सदी का भारत एक बदली हुई ज़मीन, एक बदला हुआ देश और काफी आधुनिक हो चुका दौर है. ऐसे में फर्ज़ कीजिए कि बहादुर शाह ज़फर के दरबार के सैनिकों से सलाम लेने वाले गालिब अगर दिल्ली पुलिस के सिपाहियों से उलझ जाएं.
ऐसे ही कितने बिंब समेटे है गालिब पर आधारित यह नाटक जिसे देखकर दर्शकों ने खूब सराहा भी और तालियां भी बजाईं.
गालिब पर नाटक के साथ-साथ अरविंद गौड़ के नाट्य समूह की ओर से भी साहित्य आजतक में एक नाट्य प्रस्तुति दी गई.
इसके अलावा साहित्य आजतक के दूसरे दिन एक मुलाकात नाटक का मंचन भी होगा जो कि साहिर लुधियानवी और अमृता प्रीतम की ज़िंदगी पर आधारित है. इस नाटक में साहिर का किरदार निभा रहे हैं शेखर सुमन और अमृता प्रीतम की भूमिका में नज़र आएंगी मशहूर अभिनेत्री दीप्ति नवल.
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अनुग्रह मिश्र