'प्यार अब पॉपकॉर्न जैसा...' अनन्या पांडे के बयान ने लिव-इन रिलेशनशिप और कमिटमेंट पर छेड़ी नई बहस

अनन्या पांडे ने कपिल शर्मा शो में मॉर्डन रिश्तों पर खुलकर बात की, जहां उन्होंने आज के प्यार को 90 के दशक के प्यार से तुलना करते हुए इसे 'पॉपकॉर्न लव' बताया. उन्होंने कहा कि आज के रिश्ते कमिटमेंट से डरते हैं और छोटे-छोटे कारणों से टूट जाते हैं, सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव से इमोशनल कनेक्शन वीक हुआ है, जिससे रिश्ते अस्थिर हो रहे हैं.

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डिजिटल वर्ल्ड ने रिश्ते की परिभाषा बदल दी (PHOTO:ITG) डिजिटल वर्ल्ड ने रिश्ते की परिभाषा बदल दी (PHOTO:ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 24 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:43 PM IST

बदलते वक्त के साथ रिश्तों की परिभाषा में भी काफी बदल गई है, जिसकी वजह से ब्रेकअप, तलाक भी ज्यादा बढ़ गई हैं. मॉर्डन रिलेशनशिप में रिश्ते बनने से पहले टूट रहे हैं और समय के साथ-साथ लोग कमिटमेंट से भी डरने लगे हैं. हाल ही में द कपिल शर्मा शो में अनन्या पांडे ने आज के रिश्तों पर खुलकर बात की.एक्ट्रेस ने आज के प्यार की 90 के दौर के प्यार से तुलना की, उन्होंने आजकल के प्यार को पॉपकॉर्न जैसा भी बताया. उनके इस बयान की सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है, जहां कुछ लोग उनकी बात को सपोर्ट कर रहे हैं तो कुछ उनकी बात से असहमति जता रहे हैं. 

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अनन्या पांडे को हाल ही में कार्तिक आर्यन के साथ फिल्म 'तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी' में देखा गया था, जो एक लव स्टोरी थी. अनन्या पांडे अक्सर ही अपने बयानों के चलते सुर्खियों का हिस्सा बन जाती हैं और इस बार भी उनका बयान उनको लाइमलाइट में ले आया है. हाल ही में कॉमेडियन कपिल शर्मा के शो में अनन्या ने मॉर्डन वर्ल्ड के प्यार को पॉपकॉर्न लव बताया और 90 के दशक के रिश्तों को ज्यादा कमिटमेंट वाला. 

मॉर्डन रिलेशनशिप में कोई इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं

अनन्या ने कपिल के शो में बताया कि पहले जमाने का प्यार एक तरह से इंश्योरेंस पॉलिसी जैसा होता था, एक बार कमिटमेंट हो जाए, तो उम्र भर निभाने का इरादा रहता था. मुझे लगता है कि यही कारण है कि अब वफादारी नहीं रही. ऐसा लगता है कि प्यार अब पॉपकॉर्न जैसा हो गया है. थोड़ी सी गर्मी और लोग उछलने लगते हैं, बिल्कुल पॉपकॉर्न की तरह.

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लिव-इन रिलेशनशिप को समझ रहे कमिटमेंट

एक्ट्रेस ने आगे कहा कि आजकल लोग लिव-इन रिलेशनशिप को कमिटमेंट समझ लेते हैं, उनको लगता है कि खर्चा शेयर करना और किराया बांटना ही कमिटमेंट है, हालांकि ये सब तो रूममेट्स भी करते हैं. जबकि आजकल फोन के पासवर्ड शेयर करने जैसी छोटी बातों पर भी ब्रेकअप हो जा रहे हैं और यही वजह है कि रिश्तों में लॉयल्टी कम होती जा रही है. सोशल मीडिया पर एक्ट्रेस के इस बयान पर तरह-तरह रिएक्शन आ रहे हैं. इसके साथ ही उनकी बातों को सुनकर लोगों के बीच यह सवाल भी उठ गया है कि क्या सच में आज का प्यार इतना सेंसिटिव हो गया है और इसके पीछे की वजह क्या है? 

डिजिटल दौर ने रिश्तों को कैसे बदला?

आकाश हेल्थकेयर की एसोसिएट कंसल्टेंट साइकाइट्रिस्ट डॉ. पवित्रा शंकर ने एक इंटरव्यू में बताया कि  डिजिटल लाइफ ने हमारी कमिटमेंट को देखने की सोच बदल दी है. 

  • डेटिंग ऐप्स और सोशल मीडिया पर आजकल लोगों को अनगिनत ऑप्शन दिखते हैं.
  • जब लोगों के पास ज्यादा ऑप्शन होते हैं तो वो अपने पार्टनर से कमिट करने से घबराते हैं.
  • लोगों के मन में कमिटमेंट को लेकर ख्याल आते हैं कि उनको इससे अच्छा ऑप्शन मिल जाएगा.
  • पार्टनर को समझने की बजाय आज के दौर में रिलेशनशिप में थोड़ी-सी बोरियत होते ही आजकल लोग सीधे ब्रेकअप करने पर उतर आते हैं.  
  • सोशल मीडिया पर ज्यादा ऑप्शन मिलने और लोगों के साथ बातें करने की वजह से इमोशनल कनेक्शन जैसे खत्म हो गया है.

डॉ. शंकर का मानना है कि आज भी कमिटमेंट है, लेकिन अब वो लोगों की शर्तों और टाइमलाइन के हिसाब से आता है. पहले एक के साथ ही रिश्ता परमानेंट माना जाता था, लेकिन वो तो किसी सब्सक्रिप्शन की तरह हो गया है. 

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जल्दी ब्रेकअप की वजह क्या है? 

साइकोलॉजी के मुताबिक, आजकल रिश्ते जितनी तेजी से बनते हैं, उतनी ही तेजी से टूट भी जाते हैं. इसके पीछे काफी सारी वजह है, जो आज के दौर में रिश्तों को कमजोर बना रही है. 

सबसे बड़ा कारण तो यही है कि लोगों के दिमाग में यही चलता है कि कही इस रिश्ते की वजह से उनके हाथों से कोई दूसरा बेहतर ऑप्शन न छूट जाए. 

सोशल मीडिया के बढ़ते क्रेज की वजह से आजकल लोग एक-दूसरे से इमोशनली अलग हो गए हैं. एक-दूसरे के साथ रहने के बाद भी लोग एक-दूसरे की फीलिंग को समझ नहीं पाते हैं.

कई बार कपल एक-दूसरे की अलग सोच को इनकम्पैटिबिलिटी का नाम दे देते हैं और फिर वो बिना कोशिश किए उस रिश्ते से बाहर निकल जाते हैं. 

क्या खर्चा शेयर करना ही कमिटमेंट है?

अनन्या का कहना था कि साथ रहना या खर्चा बांटना इमोशनल कनेक्शन की गारंटी नहीं देता. उनकी इस बात पर डॉ. शंकर ने सहमत जताते हुए कहा, दो लोगों का साथ रहना नजदीकी ला सकता है, लेकिन सुविधा कमिटमेंट नहीं होती. जब हालात आसान न हों, तब भी रिश्ता निभाने की कोशिश ही असली कमिटमेंट होती है.

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