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जिस पर ज्यादा बोलने से बचते हैं लोग, एक महिला ने बताए अनुभव

प्रज्ञा बाजपेयी
  • 27 दिसंबर 2017,
  • अपडेटेड 9:41 AM IST
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सिलेब्रिटीज की हाइपरसेक्सुअलिटी के बारे में तो हम बहुत बार सुनते आए हैं लेकिन आम लोगों की हाइपरसेक्सुअलिटी के बारे में बात कम ही होती है. यौन संबंध बनाने की लत या हाइपरसेक्सुअलिटी क्या नुकसानदायक है? क्या हाइपरसेक्सुअल लोग भी एक सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं?

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ऐसा माना जाता है कि जो लोग हाइपरसेक्सुअल होते हैं, उनके लिए शादी एक अच्छा आइडिया नहीं है क्योंकि इससे वैवाहिक जिंदगी प्रभावित होती हैं. हालांकि एक शादीशुदा महिला ने अपना अनुभव साझा किया है और वह बहुत ही चौंकाने वाला है.

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वह कहती हैं, मैं खुद को हाइपरसेक्सुअल मानती हूं. सेक्स ड्राइव के मामले में मैं खुद को हमेशा टॉप पर रखती हूं. मुझे शादी किए हुए 18 साल हो गए हैं और मैंने करीब-करीब हर दिन शारीरिक संबंध बनाया. एक सप्ताह में कई बार.

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मुझे कभी भी इससे थकान नहीं होती है और मैं आज तक बोर नहीं हुई. मुझे यह लगातार आकर्षित करता है और मैं सबसे ज्यादा खुशी महसूस करती हूं. वह हाइपरसेक्सुअल के साथ जुड़े एक पूर्वाग्रह को भी तोड़ रही हैं.

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वह कहती हैं, मैं केवल अपने पति के साथ ही अपने स्वाभाविक रूप में रह सकती हूं, किसी और के साथ नहीं. मुझे हाल ही में पता चला है कि मुझे अटैचमेंट डिसऑर्डर है. इंटिमेसी हमेशा से मेरे लिए मुश्किल भरा काम रहा था.

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पहले के पार्टनर्स के साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद मैं अवसाद में रहती थी. कई बार मेरे अंदर विद्रोह भी होने लगता था.

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बाद में मुझे एहसास हुआ कि दिक्कत मेरे साथ नहीं थी, बल्कि मैंने अपने पार्टनर्स का गलत चुनाव किया था. मेरे पहले के पार्टनर्स भावनात्मक रूप से ठंडे थे या फिर मेरी तरह इमोशनल अटैच्ड नहीं थे.

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जब मैं अपने पति के साथ आई तो मुझे महसूस हुआ कि मैं केवल ऐसे पार्टनर के ही साथ रह सकती हूं जिस पर मुझे बहुत ज्यादा भरोसा हो. कैजुअल सेक्स या फिर वन नाइट स्टैंड मेरे लिए नहीं है. मेरे पति ने एक्सप्लोर किया कि मेरी असली पहचान क्या है. वह एक ऐसी पत्नी पाकर बेहद खुश हैं जो हमेशा ऊर्जा और भावनात्मक रूप से सक्रिय रहती है.

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यौन संबंध मेरे लिए अद्भुत और महत्वपूर्ण है. मेरे लिए यह एक वरदान से कम नहीं है. लेकिन मुझे पता है कि अगर मेरी शादी टूटती है या कुछ और होता है तो मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी. हालांकि मुझे लगता है कि मुझे जिंदगी में उम्मीद से ज्यादा कुछ मिल चुका है.

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कनाडा स्थित यॉर्क यूनिवर्सिटी में न्यूरोसाइंटिस्ट और लेखक डेब्रा डब्ल्यू सोह बताते हैं, मैं जिस भी शख्स से मिलता हूं, वह अपनी हाइपरसेक्सुअलिटी की वजह से हर वक्त शर्मिन्दा महसूस करता है और समाज में अपना मूल्यांकन करता रहता है.

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वह कहते हैं, एक समाज के तौर पर हमें हाइपरसेक्सुअलिटी के बारे में पूर्वाग्रह और धारणाएं बनाना बंद करना चाहिए क्योंकि इससे कई लोगों की जिंदगी शर्मिन्दगी और अवसाद में बीतने लगती है. इससे समाज में लोगों के चरित्र में दोहरेपन को भी बढ़ावा मिलता है.

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हाइपरसेक्सुअल लोग भी खुशहाल शादीशुदा जिंदगी जी सकते हैं बशर्ते उनका पार्टनर उन्हें बखूबी समझता हो और उनके बीच अच्छी अंडस्टैंडिंग हो.

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