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आमिर खान को हुआ है स्वाइन फ्लू, जानिये, कैसे होता है और आप इससे कैसे बच सकते हैं

aajtak.in
  • 08 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 12:54 PM IST
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माया नगरी में एक के बाद एक बॉलीवुड एक्टर स्वाइन फ्लू के शिकार हो रहे हैं. आमिर खान और उनकी पत्नी किरण राव के बाद अब रिचा चड्‌ढा भी स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गई हैं.

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पिछले साल स्वाइन फ्लू के तीन मामले सामने आए थे. लेकिन इस साल सिर्फ मुंबई में ही जुलाई तक 835 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें 16 की मौत हो गई है. पूरे महाराष्ट्र में जुलाई के पहले सप्ताह तक 2,324 मामले सामने आ चुके हैं और इसमें 284 की मौत हो गई है. पूरे देश में जुलाई तक स्वाइन फ्लू से 600 लोगों की मौत हो चुकी है.

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हम यहां आपको स्वाइन फ्लू से संबंधित हर जानकारी दे रहे हैं. स्वाइन फ्लू का कारण, उसका रोकथाम और उससे कैसे बचाव किया जा सकता है.

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क्या है स्वाइन फ्लू : स्वाइन फ्लू को स्वाइन इन्फ्लूएंजा भी कहते हैं. यह सांस के जरिये फैलने वाली संक्रामक बीमारी है. दरसअल, यह सूअरों से संबंधि‍त बीमारी है. सूअर H1N1 स्ट्रेंस के कारण बीमार हो जाते हैं और उनकी सांस के संपर्क में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आने के कारण यह इंसानों को भी हो जाता है और फिर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्त‍ि तक फैलता है. हालांकि सूअर इस बीमारी से दो से चार दिन में ही उबर जाते हैं. इस बीमारी से सिर्फ 1 से 4 फीसदी सूअरों के ही मौत होती है.

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लक्षण : जब लोग स्वाइन फ्लू के वायरस से संक्रमित होते हैं, तो उनके लक्षण आमतौर पर मौसमी फ्लू की तरह ही होते हैं. बुखार, तेज ठंड लगना, गला खराब हो जाना, मांसपेशियों में दर्द होना, तेज सिरदर्द होना, खांसी आना, कमजोरी महसूस करना, भूख न लगना आदि लक्षण इस बीमारी के दौरान उभरते हैं. कुछ लोगों को उल्टी और दस्त भी होता है. इस साल इंसानों में जो स्वाइन फ्लू का संक्रमण हुआ है, वह तीन अलग-अलग तरह के वायरसों के सम्मिश्रण से उपजा है. H1N1 से संक्रमित कुछ लोगों की स्थ‍िति गंभीर हो जाती है, जिसके कारण उनकी मौत हो जाती है.

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कैसे होता है संक्रमण : यह मौसमी फ्लू की तरह ही संक्रमित होता है. छींकने, खांसने, नाक-आंख छूने आदि से संक्रमण फैलता है. किसी संक्रमित व्यक्त‍ि के संपर्क में आने से होता है या संक्रमित व्यक्त्‍िा द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुओं का उपयोग करने से भी यह फ्लू फैल सकता है.

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क्या है खतरा : साल 1930 में पहली बार ए1एन1 वायरस के सामने आने के बाद से 1998 तक इस वायरस के स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं हुआ. 1998 और 2002 के बीच इस वायरस के तीन विभिन्न स्वरूप सामने आए. इनके भी 5 अलग-अलग. इनके भी 5 अलग-अलग जीनोटाइप थे. मानव जाति के लिए जो सबसे बड़ा जोखिम सामने है वह है स्वाइन एन्फ्लूएंजा वायरस के म्यूटेट करने का जोकि स्पेनिश फ्लू की तरह घातक भी हो सकता है. चूंकि यह इंसानों के बीच फैलता है इसलिए सारे विश्व के इसकी चपेट में आने का खतरा है.

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कैसे बचेंगे : सूअरों को एविएन और ह्यूमन एन्फ्लूएंजा स्ट्रेन दोनों का संक्रमण हो सकता है. इसलिए उसके शरीर में एंटीजेनिक शिफ्ट के कारण नए एन्फ्लूएंजा स्ट्रेन का जन्म हो सकता है. किसी भी एन्फ्लूएंजा के वायरस का मानवों में संक्रमण श्वास प्रणाली के माध्यम से होता है. इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति का खांसना और छींकना या ऐसे उपकरणों का स्पर्श करना जो दूसरों के संपर्क में भी आता है, उन्हें भी संक्रमित कर सकता है. जो संक्रमित नहीं वे भी दरवाजा के हैंडल, टेलीफोन के रिसीवर या टॉयलेट के नल के स्पर्श के बाद स्वयं की नाक पर हाथ लगाने भर से संक्रमित हो सकते हैं.

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क्या है सावधानियां : सामान्य एन्फ्लूएंजा के दौरान रखी जाने वाली सभी सावधानियां इस वायरस के संक्रमण के दौरान भी रखी जानी चाहिए. बार-बार अपने हाथों को साबुन या ऐसे सॉल्यूशन से धोना जरूरी होता है, जो वायरस का खात्मा कर देते हैं. नाक और मुंह को हमेशा मॉस्क पहन कर ढंकना जरूरी होता है. इसके अलावा जब जरूरत हो तभी आम जगहों पर जाना चाहिए ताकि संक्रमण ना फैल सके.

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इस बात का भी ध्यान रखें : इस मौसम में किसी भीड़ वाली जगह में न जाएं. चेहरे पर मास्क लगाकर रखें या रुमाल बांधें. किसी भी ऐसे व्यक्त‍ि से दूर ही रहें, जिसे खांसी है या जिसकी नाक बह रही है. घर में किसी को ठंड लगकर बुखार आया है तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएं.

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क्या है इलाज : संक्रमण के लक्षण प्रकट होने के दो दिन के अंदर ही एंटीवायरल ड्रग देना जरूरी होता है. इससे एक तो मरीज को राहत मिल जाती है तथा बीमारी की तीव्रता भी कम हो जाती है. तत्काल किसी अस्पताल में मरीज को भर्ती कर दें, ताकि पैलिएटिव केअर शुरू हो जाए और तरल पदार्थों की आपूर्ति भी पर्याप्त मात्रा में होती रहे. अधिकांश मामलों में एंटीवायरल ड्रग तथा अस्पताल में भर्ती करने पर सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है.

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