प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में फिटनेस का स्तर उठाने के लिए 'फिट इंडिया मूवमेंट' का आगाज किया है. इस दौरान पीएम मोदी ने कई गंभीर रोगों के बारे में बताते हुए लोगों की फिटनेस को लेकर चिंता जताई. प्रदूषण और जंक फूड के कारण दिल्ली में भी लोगों की सेहत का ग्राफ काफी डाउन है. हालांकि इसी दिल्ली में दो गांव ऐसे भी हैं जिनमें रहने वाले लोगों की फिटनेस का कोई जवाब नहीं है.
दक्षिणी दिल्ली में स्थित असोला और फतेहपुर बेरी नाम के इन दोनों गांव के लोग अपनी लाजवाब फिटनेस के लिए काफी मशहूर है. इन दोनों गांव को पहलवानों और बाउंसरों की बस्ती कहा जाता है.
यहां के ज्यादातर युवा या तो पेशेवर बाउंसर्स का काम करते हैं या किसी जिम या फिटनेस सेंटर में कोचिंग दे रहे हैं. यहां रहने वालों का देसी खान-पान और अखाड़े की मिट्टी से प्यार ही इनकी लाजवाब फिटनेस का राज है.
गांव के युवा बाउंसर्स की खुराक भी काफी अच्छी है. एक बाउंसर दिन में करीब 4 लीटर दूध और 2 किलो दही और एक दर्जन केले का सेवन करता है. गांव में डेरियों की भी कमी नहीं है, इसलिए लोगों को खाने-पीने के शुद्ध प्रॉडक्ट बड़ी आसानी से मिल जाते हैं.
दोनों ही गांवों के तकरीबन हर घर का एक बेटा बाउंसर की ट्रेनिंग ले रहा है. इन बाउंसर्स को क्लब या होटेल में काफी अच्छी आमदनी मिल जाती है.
गांव में रहने वाले युवाओं के बारे में कहा जाता है कि यहां शायद ही कोई ऐसा हो जिसने कभी जिम या अखाड़ा ज्वॉइन नहीं किया. असोला गांव के कई ट्रेनर तो नामी जिमों में कोचिंग दे रहे हैं.
जो लोग फिटनेस सेंटर में ट्रेनर या पब-क्लब में बाउंसर्स का काम नहीं भी कर रहे हैं, वे भी दिनभर कसरत में जुटे रहते हैं. चौपाल में बैठे लोगों के बीच कुश्ती और अखाड़े के अलावा दूसरा कोई विषय ही नहीं रहता.
एक और सबसे खास बात इन गावों के बारे में ये है कि यहां नशीले पदार्थों का सेवन न के बराबर होता है. गांव के अखाड़ों में कसरत करने वाले लड़के भी अपने भविष्य को लेकर बेहद स्पष्ट हैं.
-प्रतिकात्मक तस्वीरें