मां बनना हर एक महिला के लिए जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी होती है लेकिन आजकल की भागदौड़ वाली लाइफस्टाइल की वजह से कई बार महिलाओं को गर्भधारण में मुश्किल आती है. कई बार गर्भवती होने का इंतजार करना बेहद तनाव भरा भी हो सकता है. लेकिन अगर अपनी प्रेग्नेंसी की ठीक से प्लानिंग करती हैं और छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखती हैं तो आपके घर भी जल्द से जल्द बच्चे की किलकारी गूंज सकती है. इस आर्टिकल में हम आपको डॉक्टरों द्वारा बताए गए कुछ तरीकों की जानकारी दे रहे हैं जो आपकी जल्दी कंसीव (गर्भधारण) करने में मदद करेंगे.
यहां हम आपको ऐसी कोई डाइट या नुस्खे के बारे में नहीं बता रहे हैं जिससे आपकी गर्भावस्था की प्रक्रिया तेज हो जाएगी बल्कि वास्तव में गर्भधारण के पीछे कुछ ऐसे बायोलॉजिकल फैक्टर होते हैं जिन पर ध्यान देकर आप अपनी गर्भावास्था की संभावनाओं को बढ़ा सकती हैं और जल्द ही प्रेग्ननेंट हो सकती हैं.
1. अपने पीरियड्स के साइकिल पर ध्यान दें
गर्भवती होने के लिए सबसे पहले महिलाओं को अपने पीडियड्स के साइकिल को समझने की जरूरत है ताकि आदर्श समय में शुक्राणु अंडे से मिलें और एक स्वस्थ बच्चे का जन्म हो. स्त्री रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि एक सामान्य पीरियड साइकिल में ओव्यूलेशन का समय आमतौर पर पीरियड साइकिल के 13वें से 18वें दिन के बीच होता है.
ये गर्भावास्था के लिहाज से सबसे फर्टाइल पीरियड होता है. इस दौरान अगर कोई कपल रिलेशन बनाता है तो इससे प्रेग्नेंसी का चांस 99 प्रतिशत होता है. हालांकि इसका बेस्ट टाइम पता करना आसान नहीं है लेकिन विभिन्न ऑनलाइन ऐप्स की मदद से अब ओव्यूलेशन को ट्रैक किया जा सकता है. महिलाएं अपने किसी भी नजदीकी मेडिकल स्टोर से फर्टाइल साइकल की जांच करने वाली ओव्यूलेशन किट खरीद कर इसकी जांच कर सकती हैं.
2. इंटरकोर्स के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
ओव्यूलेशन के अलावा सबसे जरूरी चीज ये है कि सेक्स के बाद कपल तुरंत नहाने के लिए वॉशरूम में ना जाएं. प्रेग्नेंसी की प्लानिंग करते समय ये भी ध्यान रखें कि इस दौरान आप दोनों लोगों में किसी के एक के जरिए भी गर्भ निरोधक से जुड़ी किसी भी चीज का इस्तेमाल ना हो रहा हो. वहीं डॉक्टर गर्भावास्था के लिए सेक्स के दौरान किसी भी तेल या क्रीम का प्रयोग ना करने की भी सलाह देते हैं.
3. फोलिक एसिड की गोलियां लें
महिलाओं के लिए जल्दी गर्भवती होने का तीसरा तरीका ये है कि वो गर्भावस्था की प्लानिंग करने से तीन महीने पहले फोलिक एसिड की गोलियों का सेवन शुरू कर दें क्योंकि इससे उनके गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है. फोलिक एसिड की गोलियां ओव्यूलेशन, फर्टिलाइजेश को बढ़ाने के साथ ही भ्रूण के विकास में भी मदद करती हैं. ये छोटी-छोटी गोलियां महिलाओं की बच्चे की ख्वाहिश पूरी करने में बेहद मददगार होती हैं. हालांकि आप किसी डॉक्टर से जांच कराने के बाद ही इन गोलियों का सेवन करें.
4.डॉक्टर की मदद जरूर लें
कई बार सभी तरीके आजमाने के बाद भी महिलाओं को प्रेग्नेंट होने में समय लगता है या दिक्कत होती है. इस स्थिति में डॉक्टर की जांच जरूरी है. अगर कोई महिला मासिक धर्म की अनियमितता, व्हाइट डिस्चार्ज, टीबी की बीमारी या पेट की सर्जरी जैसी किसी मेडिकल कंडीशन से गुजर रही है तो इस स्थिति में उसे डॉक्टर या स्पेशलिस्ट से कंसल्ट करना चाहिए जो उनकी प्रेग्नेंसी की प्लानिंग में बेहतर तरीके से मदद कर सकता है.
5. रेगुलर मेडिकल चेकअप्स
डॉक्टर अक्सर प्रेग्नेंसी प्लैन कर रही महिलाओं को उनके मासिक धर्म के दौरान अपने हार्मोन्स की जांच और हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी करवाने की सलाह देते हैं ताकि उनकी फैलोपियन ट्यूब की क्षमता का पता चल सके. हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें गर्भाशय की जांच के लिए यूटरस के जरिए एक दूरबीन को गर्भाशय में डाला जाता है. क्योंकि फैलोपियन ट्यूब फर्टिलाइजेशन के लिए जरूरी है इसलिए कोई भी संक्रमण या पेट की सर्जरी गर्भावस्था को प्रभावित कर सकती है. फैलोपियन ट्यूब का स्वस्थ होना जरूरी है क्योंकि वहां ही फर्टिलाइजेशन होता है.
6. प्रेग्नेंसी के लिए मां के साथ पिता का भी स्वस्थ होना जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि एक हेल्दी प्रेग्नेंसी और बच्चे के जन्म के लिए महिला का ही नहीं पुरुष का भी पूरी तरह स्वस्थ होना जरूरी है. गर्भावास्था के लिए ये भी जरूरी है कि पुरुष का सीमन (वीर्य) नॉर्मल और हेल्दी हो. अगर सीमन में कोई हाइड्रोसील होता है तो उसे जल्द से जल्द किसी विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए. हाइड्रोसील एक तरह की बीमारी है जिसमें पुरुषों के अंडकोष में फ्ल्यूड्स जमा होने लगता है जिससे दर्द या कोई दिक्कत तो नहीं होती लेकिन इसकी वजह से आगे चलकर सैक्शुअल रिलेशन में दिक्कत हो सकती है और ये इनफर्टिलिटी का भी कारण है.
इसके अलावा अगर कोई कपल बच्चे की प्लैनिंग कर रहा है तो उन दोनों को अपनी लाइफस्टाइल भी हेल्दी रखनी चाहिए. उन्हें हेल्दी डाइट लेनी चाहिए और रोजाना कसरत करनी चाहिए. इसके अलावा उन्हें धूम्रपान, शराब और हर प्रकार का नशा पूरी तरह छोड़ देना चाहिए क्योंकि इससे शुक्राणु की गुणवत्ता प्रभावित होती है.
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