Rapid Weight Loss Injections: आजकल वजन घटाने वाले इंजेक्शन की चर्चा चारों तरफ हो रही है. दरअसल, Wegovy और Mounjaro (मौनजारो) जैसे इंजेक्शन जब से बाजार में आए हैं, तब से उन लोगों के लिए वजन घटाने की उम्मीद बढ़ गई है, जो लंबे समय से वजन कम करने की कोशिश कर रहे थे. इसके साथ ही वो लोग भी वजन घटाने के लिए वेट लॉस इंजेक्शंस का सहारा ले रहे हैं, जिन्हें डाइट और एक्सरसाइज से वजन कम करने में परेशानी होती है. सोशल मीडिया से लेकर डॉक्टरों के क्लिनिक तक, हर जगह इन ‘वेट लॉस जैब्स’ की बात हो रही है.
इनके बढ़ते ट्रेंड के बीच ब्रिटेन के डॉक्टर्स ने एक अहम चिंता जताई है. उनका कहना है कि हाल के समय में गॉलब्लैडर सर्जरी के मामले काफी बढ़ गए हैं. शक जताया जा रहा है कि इनका संबंध तेजी से वजन घटाने वाले इंजेक्शंस से हो सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि बहुत जल्दी वजन कम होने से गॉलब्लैडर में पथरी बनने का खतरा बढ़ सकता है. फिलहाल इस सवाल का जवाब साफ नहीं है. डॉक्टरों का कहना है कि किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने से पहले इस पर और रिसर्च जरूरी है.
10 साल में सबसे ज्यादा बढ़ीं गॉलब्लैडर सर्जरी
NHS (नेशनल हेल्थ सर्विस) इंग्लैंड के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024-25 में गॉलब्लैडर निकालने की सर्जरी की संख्या पिछले 10 वर्षों में सबसे ज्यादा देखी गई है. ये आंकड़े डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स की चिंता बढ़ा रहे हैं. डॉक्टर्स का कहना है कि हाल के महीनों में जिन मरीजों में गॉलब्लैडर स्टोन की समस्या सामने आ रही है, उनमें से कई लोग पहले वेट लॉस इंजेक्शन ले चुके हैं. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इन इंजेक्शनों और गॉलब्लैडर की बीमारी के बीच सीधा संबंध है या नहीं, लेकिन लगातार ऐसे मामले सामने आना सवाल जरूर खड़े कर रहा है.
डॉक्टर्स का मानना है कि तेजी से वजन घटने पर शरीर में कुछ ऐसे बदलाव होते हैं, जो गॉलब्लैडर में पथरी बनने का खतरा बढ़ा सकते हैं. इसी वजह से एक्सपर्ट्स इस पूरे ट्रेंड को गंभीरता से लेते हुए और बारीकी से की जाने वाली रिसर्च की जरूरत पर जोर दे रहे हैं.
ब्रिटिश ओबेसिटी एंड मेटाबॉलिक स्पेशलिस्ट सोसाइटी के अध्यक्ष और जाने-माने सर्जन डॉ. अहमद अहमद का कहना है कि हाल के समय में उन्हें पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा गॉलब्लैडर सर्जरी करनी पड़ रही हैं. उनके मुताबिक, ये एक नया और चिंता बढ़ाने वाला ट्रेंड है.
डॉ. अहमद का कहना है कि अब ज्यादा मरीज गॉलब्लैडर की समस्या लेकर आ रहे हैं. कई लोग खुद ही बताते हैं कि उन्होंने पहले वेट लॉस इंजेक्शन लिए थे. उनका कहना है, 'अब पहले से कहीं ज्यादा मरीज ये कह रहे हैं कि वे वेट लॉस इंजेक्शन का इस्तेमाल कर चुके हैं.'
हालांकि डॉक्टर ये भी साफ करते हैं कि अभी किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा, लेकिन मरीजों में दिख रहा यह पैटर्न मेडिकल एक्सपर्ट्स को सोचने पर जरूर मजबूर कर रहा है.
सवाल ये भी उठता है कि गॉलब्लैडर की समस्या के पीछे वेट लॉस इंजेक्शंस के साइड इफेक्ट्स हैं या फिर तेजी से वजन कम होना इसकी वजह है. दरअसल, वजन घटाने वाले इंजेक्शंस के साइड इफेक्ट्स में गॉलब्लैडर स्टोन पहले से ही शामिल हैं.
लेकिन असली सवाल ये है कि क्या इंजेक्शन खुद गॉलब्लैडर स्टोन बना रहे हैं? या फिर तेजी से वजन कम होने की वजह से स्टोन बन रहे हैं? डॉ. अहमद कहते हैं, 'अभी ये साफ नहीं है कि इसकी असली वजह क्या है. इस पर और रिसर्च करने की जरूरत है.'
ब्रिटेन की दवा नियामक संस्था MHRA ने कहा है कि वेट लॉस इंजेक्शन की लगातार समीक्षा की जा रही है. हाल ही में MHRA ने Wegovy जैसे GLP-1 इंजेक्शंस को लेकर चेतावनी जारी की है. इसमें एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का खतरा बताया गया है, जो अक्सर गॉलब्लैडर स्टोन से जुड़ा होता है.
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के रिसर्चर्स के अनुसार, पिछले एक साल में करीब 16 लाख ब्रिटिश लोग वेट लॉस इंजेक्शन इस्तेमाल कर चुके हैं. ज्यादातर लोगों ने ये इंजेक्शन प्राइवेट तौर पर लिए, ना कि NHS के जरिए. अच्छी बात ये है कि अधिकतर लोगों को कोई गंभीर परेशानी नहीं हुई.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क