Oral hygiene guide: बच्चे का पहला दांत आमतौर पर 6 से 10 महीने की उम्र के बीच निकलता है और फिर 3 साल की उम्र तक उनके सभी 20 दांत आ जाते हैं. जब तक दांत नहीं आते, बच्चे अपने मसूड़ों से ही मुलायम खाना खाते हैं और उनका ही बाकी कामों में इस्तेमाल होता है. लेकिन जब बच्चों के दूध के दांत आते हैं तो अक्सर पैरेन्ट्स मानकर चलते हैं कि इन्हें तो गिरना ही है तो उनकी इतनी केयर की जरूरत नहीं है जो कि पूरी तरह गलत है. दरअसल, माता-पिता की यही लापरवाही बच्चे के जबड़े की बनावट और मुस्कान पर भारी पड़ सकती है.
डॉक्टर्स के मुताबिक, जैसे बड़े लोग अपने दातों की केयर करते हैं, उसी तरह बच्चे के मसूड़ों और दूध के दातों की केयर करनी चाहिए. डेंटिस्ट ने Aajtak.in को बताया कि दूध के दांत न केवल बच्चों को बोलने और चबाने में मदद करते हैं, बल्कि वे आने वाले पक्के दांतों के लिए एक 'गाइड' की तरह रास्ता भी तैयार करते हैं. तो आइए छोटे बच्चों की ओरल हाइजीन को मेंटेन करने के लिए किस उम्र में ब्रश शुरू करना चाहिए, टूथपेस्ट की कितनी मात्रा सुरक्षित है, और क्यों रात का ब्रश सुबह जितना ही जरूरी है इस बारे में जान लीजिए.
कानपुर के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में डेंटिस्ट डॉ. लक्ष्मी टंडन ने Aajtak.in को बताया, 'जैसे ही बच्चे का पहला दांत निकलता है, उसी समय से उसकी सफाई शुरू कर देनी चाहिए. शुरू में साफ और गीले कपड़े या फिंगर ब्रश से दांत और मसूड़ों को हल्के हाथ से साफ करना चाहिए. एक साल की उम्र के बाद बच्चों के लिए सॉफ्ट ब्रिसल वाला छोटा टूथब्रश इस्तेमाल किया जा सकता है.'
'2 साल के बाद चावल के दाने के बराबर फ्लोराइड टूथपेस्ट लगाकर दिन में 2 बार ब्रश कराना चाहिए. शुरुआत से ब्रश करने की आदत डालने से दांत सड़ने का खतरा कम होता है और बच्चों के पक्के दांत भी स्वस्थ रहते हैं.'
डॉ. टंडन का कहना है, 'अक्सर लोग सोचते हैं कि दूध के दांत तो गिर ही जाएंगे तो उनकी देखभाल क्यों करना? लेकिन यह सोच बिल्कुल गलत है. दूध के दांत बच्चों के पक्के दांतों के लिए रास्ता तैयार करते हैं और जब तक पक्के दांत नहीं आते, तब तक यही दांत चबाने, बोलने और चेहरे की सही बनावट में मदद करते हैं.'
'अगर दूध के दांत समय से पहले खराब या गिर जाएं तो पक्के दांत टेढ़े-मेढ़े निकल सकते हैं. साथ ही दूध के दांतों में इंफेक्शन होने से पक्के दांत भी प्रभावित हो सकते हैं इसलिए बच्चों के दूध के दांतों की नियमित सफाई और समय-समय पर डेंटल चेकअप बहुत जरूरी है.'
'जिन बच्चों के अभी दांत नहीं आए हैं, उनके मसूड़ों की सफाई भी उतनी ही जरूरी होती है. दरअसल, दूध या फॉर्मूला फीडिंग के बाद मसूड़ों पर जमी गंदगी और बैक्टीरिया भविष्य में दांतों की समस्याओं का कारण बन सकते हैं. इसलिए दिन में एक-दो बार साफ और गीले मुलायम कपड़े या गॉज से बच्चे के मसूड़ों को हल्के हाथ से पोंछना चाहिए.'
'इससे मसूड़े स्वस्थ रहते हैं, इंफेक्शन का खतरा कम होता है और जब दांत निकलते हैं तो वे मज़बूत और स्वस्थ आते हैं. साथ ही, बच्चे को शुरू से ही ओरल हाइजीन की आदत भी पड़ जाती है.'
डॉक्टर कहती हैं, 'छोटे बच्चों का ब्रश करते समय टूथपेस्ट निगल लेना एक आम बात है और अधिकतर मामलों में इससे कोई गंभीर नुकसान नहीं होता. लेकिन यदि बच्चा रोजाना अधिक मात्रा में फ्लोराइड युक्त पेस्ट निगलता है तो इससे पेट में दर्द, उल्टी या लंबे समय में दांतों पर सफेद दाग पड़ने की समस्या हो सकती है इसलिए 2 साल से कम उम्र के बच्चों में बिना पेस्ट या बहुत कम मात्रा में पेस्ट का इस्तेमाल करना चाहिए. बड़े बच्चों को भी काफी कम मात्रा में पेस्ट का इस्तेमाल करें और ब्रश करते समय उन पर नजर रखना जरूरी है.'
डॉ. टंडन ने कहा, 'बच्चों के लिए भी बड़ों की तरह दिन में 2 बार ब्रश करना जरूरी होता है. सुबह ब्रश करने से रात भर जमा बैक्टीरिया साफ होते हैं और रात को ब्रश करने से दिन भर खाने के बाद दांतों पर जमी गंदगी हटती है.'
'सिर्फ रात को एक बार ब्रश करने से दांत पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहते, खासकर तब जब बच्चा दिन में मीठी चीजें खाता है. दिन में 2 बार ब्रश कराने की आदत से दांतों में कीड़े लगने का खतरा कम होता है और दूध व पक्के दोनों दांत लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं.'
मृदुल राजपूत