'1 साल तक सोना न खरीदें', गोल्ड की जगह अब ये सस्ती चीज खरीदने लगे लोग

आर्टिफिशियल या गोल्ड प्लेटेड ज्वेलरी का सबसे बड़ा फायदा इसका किफायती होना है. जहां गोल्ड खरीदने में एक भारी बजट खर्च हो जाता है और उसी रकम में सीमित डिजाइन ही मिल पाते हैं. वहीं आर्टिफिशियल ज्वेलरी में एक ही बजट में कई अलग-अलग डिजाइन और सेट्स खरीदे जा सकते हैं.

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अच्छी क्वालिटी की आर्टिफिशियल ज्वेलरी चार से पांच साल तक अपनी चमक बनाए रख सकती है. (Photo: ITG) अच्छी क्वालिटी की आर्टिफिशियल ज्वेलरी चार से पांच साल तक अपनी चमक बनाए रख सकती है. (Photo: ITG)

रिदम जैन

  • जयपुर,
  • 12 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:51 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना न खरीदने की हालिया अपील और बदलते फैशन ट्रेंड के बीच अब लोगों की नजरें एक नए विकल्प पर टिक गई हैं. यह विकल्प स्टाइलिश, बजट फ्रेंडली और सुरक्षित है. सोना न खरीदने की अपील के बाद इन दिनों बाजार में आर्टिफिशियल और गोल्ड प्लेटेड ज्वेलरी की डिमांड तेजी से बढ़ी है. खास बात यह है कि अब यह ज्वेलरी सिर्फ 'कॉपी' या 'सस्ता विकल्प' भर नहीं रह गई, बल्कि फैशन इंडस्ट्री में खुद एक ट्रेंडसेटर बन चुकी है.

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जयपुर समेत देश के कई शहरों में ऐसी आर्टिफिशियल ज्वेलरी तैयार की जा रही है जिसे देखकर असली और नकली में फर्क कर पाना तक मुश्किल हो जाता है. खासकर जयपुर की मशहूर मीनाकारी ज्वेलरी, टेंपल ज्वेलरी, सेमी प्रेशियस एमराल्ड, टैंजनाइट, ब्लू सैफायर, रूबी, पर्ल्स और अन्य स्टोन्स के साथ बनाए जा रहे सेट्स लोगों को बेहद आकर्षित कर रहे हैं. कहा जा रहा है कि जितना खर्च आज एक गोल्ड ज्वेलरी के केवल मेकिंग चार्जेस में आता है, उतने बजट में कई खूबसूरत आर्टिफिशियल सेट्स खरीदे जा सकते हैं.

4 से 5 साल नहीं जाती चमक
आज की मॉडर्न आर्टिफिशियल ज्वेलरी सिर्फ दिखने में ही प्रीमियम नहीं है, बल्कि इसकी क्वालिटी भी पहले के मुकाबले काफी बेहतर हो चुकी है. खासकर ब्रास यानी पीतल से बनाई जा रही ज्वेलरी को एंटी-एलर्जिक माना जाता है, जिससे स्किन एलर्जी या रिएक्शन होने की संभावना बेहद कम रहती है. इसके अलावा यह जल्दी टार्निश भी नहीं होती है, यानी इसकी चमक लंबे समय तक बरकरार रहती है. ज्वेलरी कारोबारियों का कहना है कि अच्छी क्वालिटी की ब्रास बेस्ड आर्टिफिशियल ज्वेलरी कम से कम चार से पांच साल तक अपनी चमक बनाए रख सकती है. यही कारण है कि अब लोग इसे सिर्फ ओकेशनली नहीं बल्कि, लॉन्ग टर्म में इस्तेमाल के तौर पर भी देखने लगे हैं.

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आर्टिफिशियल ज्वेलरी का सबसे बड़ा फायदा इसका किफायती होना है. जहां गोल्ड खरीदने में एक भारी बजट खर्च हो जाता है और उसी रकम में सीमित डिजाइन ही मिल पाते हैं. वहीं आर्टिफिशियल ज्वेलरी में एक ही बजट में कई अलग-अलग डिजाइन और सेट्स खरीदे जा सकते हैं. महिलाएं अब हर आउटफिट, फंक्शन और मूड के हिसाब से अलग-अलग ज्वेलरी रखना पसंद कर रही हैं और यही खूबी आर्टिफिशियल ज्वेलरी को ज्यादा खास बनाती है. इसमें कस्टमाइजेशन के विकल्प भी बहुत ज्यादा हैं. ग्राहक अपनी पसंद के स्टोन्स, पॉलिश, कलर कॉम्बिनेशन और डिजाइन पैटर्न के अनुसार ज्वैलरी तैयार करवा सकते हैं, जो कि गोल्ड ज्वैलरी में काफी महंगा पड़ता है.

चोरी या खोने का डर भी नहीं
ट्रैवलिंग के दौरान भी आर्टिफिशियल ज्वेलरी को सबसे सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है. महंगे गहनों में चोरी या खोने का डर बना रहता है. जबकि आर्टिफिशियल ज्वेलरी में महिलाएं बिना तनाव के हैवी और रॉयल लुक कैरी कर सकती हैं. खासकर वेडिंग और डेस्टिनेशन वेडिंग में इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है. लोगों का कहना है कि शादी में ऐसी ज्वैलरी चाहिए होती है जो देखने में बेहद हैवी और रॉयल लगे. लेकिन अगर वही डिजाइन गोल्ड में बनवाए जाएं तो पूरा बजट हिल सकता है.

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ऐसे में गोल्ड प्लेटेड और आर्टिफिशियल ज्वेलरी एक फायदे का सौदा साबित हो रही है. फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल ज्वेलरी केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मुख्यधारा का फैशन ट्रेंड बनने वाली है. कम कीमत, शानदार डिजाइन, कस्टमाइजेशन, सुरक्षा, एंटी एलर्जिक क्वालिटी और लंबे समय तक बरकरार रहने वाली चमक जैसे फैक्टर इसे हर वर्ग के लोगों के लिए आकर्षक बना रहे हैं. यही वजह है कि आज बाजारों में आर्टिफिशियल ज्वेलरी की डिमांड लगातार बढ़ रही है और लोग इसे स्मार्ट शॉपिंग का नया मंत्र मान रहे हैं.

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